सही राह पर चलने वाले क्या पाते हैं, यह तो पता नहीं, पर कुछ खो नहीं सकते, यह निश्चित है ।

मुनि श्री कुंथुसागर जी

कटु शब्दों को एक कान से सुनकर दूसरे से निकाल दें।
प्रशंसा के लिये दोनों कान बंद कर लें।
धर्म-चर्चा के लिये दोनों खुले रक्खें ।

(सुरेश भाई के कथन पर आधारित चिंतन)

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