मेरी गलतियाँ मुझसे कहिये, औरों से नहीं ;
सुधरना मुझे है, औरों को नहीं ।
(शिल्पी-हैदराबाद)
प्रायः , धर्म याने अपना अपना काम,
जैसे चोर चोरी को अपना धर्म कहता है।
पर असली धर्म के माने हैं –
जो अपना काम* करे।
(चिंतन)
*भला
बच्चों में माँ का खून 9 माह तक घूमता रहता है पर उनका Blood Group अलग अलग होता है ।
अपने अपने कर्मों के अनुसार, सबकी स्वतंत्र सत्ता है ।
चिंतन
“Walking” is the best exercise…!
‘Walk Away’ from arguments that lead you to nowhere but anger.
‘Walk Away’ from people who delebrately put you down.
‘Walk Away’ from any thought that reduces your worth.
‘Walk Away’ from failures and fears that stifle your dreams.
The more you ‘Walk Away’ from things that poison your soul, the happier your life would be.
Gift Yourself A Walk Towards Happiness
वास्तु/ज्योतिष कारक (कारण) नहीं है, सूचक हैं ।
पं बृषभप्रसाद जी जैन
सबसे ज्यादा पूज्य राम को क्यों माना गया है ?
क्षमाभाव की उत्कृष्टता की वजह से ।
कैकई से ही आर्शीवाद मांग रहे थे कि वे उनका वचन निभा सकें ।
मुनि श्री सुधासागर जी
Life is like a Boxing game.
Defeat is not declared when you fall down,
but when you refuse to getup.
जब जिंदगी एक है,
भोजन दो बार ही करते हो,
तो मकान/गाडियाँ बहुत, धन लाखों/करोडों में क्यों ?
बड़े बड़े ज्ञानियों के विचारों को भुला दिया गया पर जिन्होंने अनुभव से सीखा/बताया वे याद रखे गये – महावीर, कबीर, सूरदास आदि ।
आचार्य विद्यासागर जी की अनुभव पर लिखी “मूकमाटी” प्रसिद्ध हुई ।
श्री धर्मेंद्र
Give same respect what you deserve,
to even those who don’t deserve it.
Because it will be the respect to your character.
सबकी प्रथम गुरु आत्मा है ।
उसकी अंतरध्वनि को सुनना वरना वह सो जायेगी ।
यदि पहले से सोई हो तो ?
उसे जगाओ ।
कैसे ?
उससे पूछते रहो – यह काम किया, सही था या गलत !
प्राय : हम संस्कारों की सुनते हैं, अंतरात्मा की नहीं ।
बाई जी
इस साईट के प्रणेता- गुरूवर मुनि श्री क्षमासागर जी महाराज का आज समाधिमरण हो गया ।
पूज्य मुनि श्री ने पिछले दो दिनों से आहार नहीं लिया था ।
मुनि श्री भव्यसागर जी ने उन्हें अंतिम संबोधन दिया ।

हम सब आज के दिन को “क्षमा-दिवस” के रूप में मनायें और उन लोगों के प्रति विशेष रूप से क्षमा भाव रखें, जिनसे मन मुटाव हुआ हो ।
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क्रोध से दाग पड़ता है,
क्षमा आने पर दाग बढ़ना बंद हो जाता है,
प्रेम उस दाग को साफ कर देता है ।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
Luxury and Lies have huge maintenance cost.
Simplicity and Truth are self-maintained without any cost.
(Anshumala)
संघर्ष को यदि इस द्रष्टि से देखें-
“संग+हर्ष”
तो जीवन हर्षमय हो जायेगा।
(संजय)
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