निंदा तो उसी की होती है, जो जिंदा है,
मरे हुए की तो बस तारीफ ही होती है।

(दिव्या-लंदन)

दो दिनों से भूचाल का कहर देख रहे हैं, पीड़ितों के प्रति सद्भावना तथा उनकी सहायता करें,
विचारें – भूमि अपना स्वभाव छोड़कर जब चलने लगती है तब कैसा विध्वंस होता है !
हम अपना धार्मिक स्वभाव छोड़ कर चलेंगे तो हमारे जीवन का विध्वंस नहीं होगा ??

चिंतन

कचरे की गाड़ी निकलने पर कोई ऐतराज नहीं करता,
पर ऊपर वाले का जलूस निकलने पर, नीचे वाले लोग, एक दूसरे का विरोध करते हैं ।

मुनि श्री पुलकसागर जी

कटु शब्दों को एक कान से सुनकर दूसरे से निकाल दें।
प्रशंसा के लिये दोनों कान बंद कर लें।
धर्म-चर्चा के लिये दोनों खुले रक्खें ।

(सुरेश भाई के कथन पर आधारित चिंतन)

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