Category: वचनामृत – मुनि श्री क्षमासागर

बुरा

बुराई करने वाला बुरा नहीं होता है, (वो तो बस) बुराई करने से बुरा हो जाता(सिर्फ बुराई करते समय)। गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी

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अंत समय में

संथारा- (श्वेताम्बर परंपरा) = आखिरी शयन, Jumping Board – इस शरीर से दूसरे शरीर के लिये। सल्लेखना – (दिगम्बरी परंपरा) – भीतर कषाय (क्रोधादि) को

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पाप पुण्य और अगला जीवन

इस जीवन में किसी ने लगातार पाप किये पर मरते समय/ अगले जीवन के निर्णय का समय आने पर भाव बहुत अच्छे हो गये/पश्चातापादि कर

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वैराग्य / संसार

पुत्र के वैराग्य भावों से डरकर पिता ने उसे सुरा-सुंदरियों से घिरवा दिया। बेटे ने सन्यास न लेकर संसार ही चुना। 1. उसके जीवन का

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घमंड / वैभव

आचार्य श्री विद्यानंद जी के प्रवचनों को सुनने एक संभ्रांत महिला रोजाना आती थीं पर चटाई पर न बैठकर जमीन पर बैठतीं थीं। कारण :

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भगवान महावीर जयंती

जीना है तो जीने दें, वरना जीना सम्भव नहीं हो पायेगा। दूसरे को मारा नहीं सो अहिंसा पर दूसरे को बचाया नहीं तो अहिंसा का

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रूप / स्वरूप

विनोबाभावे जी के घर एक अनाथ बच्चा रहता था। विनोबा जी की माँ उस बच्चे को गरम और अपने बेटे को ठंडी रोटी देतीं थीं।

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अतृत्प

गुरुवर मुनि श्री क्षमा सागर जी का समाधि दिवस। इस दिवस को “क्षमा दिवस” के रूप में मनायें।

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ग्रंथि

ग्रंथि 2 प्रकार की – 1) चीज़ों के सद्भाव में (Superiority Complex से)… a) वैभव की ग्रंथि b) व्रतियों में त्याग की 2) चीज़ों के

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मंगल आशीष

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