Category: डायरी
Perfect / Defect
Perfect बनने की कोशिश करने वालों में प्राय: Defect आ जाते हैं, अपने Defect निकालते रहने वाले एक दिन Perfect बन जाते हैं ।
समझदारी
खुद की समझदारी भी अहमियत रखती है, वरना याद रहे …. युधिष्ठिर और दुर्योधन के गुरु एक ही थे । (सुरेश)
याद नहीं रहता
छोटे भाई ने बड़े भाई का लड्डु मुँह में डाला ही था कि बड़े ने उसका मुँह दबाकर लड्डु निकाल लिया । छोटा – जितनी
जिज्ञासा / क्षमता
पाचन-शक्ति के अभाव में, अकेले घी पीने से कोई पहलवान नहीं बनता, इसी तरह श्रद्धा/जिज्ञासा/प्रारम्भिक-ज्ञान बिना,अध्यात्म-ग्रंथ पढ़ लेने से कोई ज्ञानी नहीं बनता ।
जीवन
बचपन में – ज्ञानार्जन, युवावस्था में – धनार्जन, वृद्धावस्था में – पुण्यार्जन (करना तो चाहिये तीनों अवस्थाओं में )
पर-दृष्टि
दर्पण में छवि दुगनी दूरी पर बनती/दिखती है । दूसरे की दृष्टी से अपने आप को देखोगे तो बहुत दूरी से देखने के कारण सही
संसार / मोक्ष
संसार – संयोग संबंध बनाना/सच्चा मानना, मोक्ष – संयोग संबंध छोड़ना/झूठा मानना ।
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