Category: डायरी
बोलना
” मनचाहा ” बोलने के लिए , ” अनचाहा ” सुनने की ताकत होनी चाहिए । (शुचि)
बदलना
स्वयं को बदलना…कितना कठिन है… फिर दूसरे को बदलना…कैसे सरल हो सकता है ! (मंजू)
विश्वास
कुछ चीज़ें ‘कमजोर’ की हिफाज़त में भी ‘महफूज़’ रहती हैं, जैसे ‘मिट्टी की गुल्लक में लोहे के सिक्के…’ बशर्ते विश्वास हो । (सुरेश)
परोपकार
फूंक मार कर दिये को बुझा सकते हैं.! किन्तु… अगरबत्ती को नहीं… क्योंकि जो ख़ुद को जलाकर दूसरों को सुगंध का अनुभव कराता हो, उसे
सन्मान
सन्मान हमेशा समय का होता है, लेकिन आदमी उसे अपना समझ लेता है । (मंजू)
ज़िन्दगी
गुज़रते दिनों का नहीं.. बल्कि यादगार लम्हों का नाम है… ज़िंदगी… (सुरेश) इसलिये ऐसे काम करें जिन्हें याद करके गर्व हो/ सुखद अनुभूति हो ।
भ्रम और उपकार
पेड़ में मनुष्य के आकार की कल्पना करके उससे उपकार की अपेक्षा, भ्रम टूटने के साथ समाप्त हो जाती है । ऐसे ही आत्मज्ञान हो
मरणकाल में सम्बोधन
मरणकाल में रुचिकर धार्मिक-क्रियाओं का ही स्मरण करायें । संसारी चीज़ों से वैराग्य करायें । यदि स्वाध्यायी हों तो ही आत्मबोध दें ।
योग / उपयोग
“योग” मिलते हैं, उनका “उपयोग” अच्छे या बुरे में करना “प्रयोग” है , अच्छे में “सदुपयोग”, बुरे में “दुरुपयोग” । अच्छा स्वास्थ्य योग है, भोगों
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