Category: डायरी

कर्म / धर्म

मुख्यत: कर्म से वैभव, धर्म से संतोष और शान्ति । सो अन्तरंग में धर्म रखकर कर्म करो, खटकर्म से दूर रहो ।

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माँ / गुरु

माँ जन्म देती है, सो उपकारी; गुरु जन्म,जरा,मृत्यु से छुटकारा दिलाने का रास्ता दिखाते हैं, सो परम-उपकारी ।

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घमंड

घमंड से अपना सर ऊँचा न करें, जीतने वाले भी अपना गोल्ड मैडल सिर झुका के हासिल करते हैं..! (सुरेश)

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संगति

कभी कभी धागे बड़े कमज़ोर चुन लेते हैं, हम ! और फिर पूरी उम्र, गाँठ बाँधने में ही निकल जाती है !! (सुरेश)

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संयम

यम आने से पहले अपने विकारों के लिए संयम के हथियार लिए, ख़ुद यम बन जाओ ।

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शरीर

शरीर स्वयं(अपनी आत्मा) का सोचा नहीं करता है, क्योंकि आत्मा, शरीर के लिए परद्रव्य है । (मंजु)

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मंगल आशीष

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