Category: डायरी
कर्म / धर्म
April 23, 2017
मुख्यत: कर्म से वैभव, धर्म से संतोष और शान्ति । सो अन्तरंग में धर्म रखकर कर्म करो, खटकर्म से दूर रहो ।
माँ / गुरु
April 21, 2017
माँ जन्म देती है, सो उपकारी; गुरु जन्म,जरा,मृत्यु से छुटकारा दिलाने का रास्ता दिखाते हैं, सो परम-उपकारी ।
घमंड
April 20, 2017
घमंड से अपना सर ऊँचा न करें, जीतने वाले भी अपना गोल्ड मैडल सिर झुका के हासिल करते हैं..! (सुरेश)
संगति
April 18, 2017
कभी कभी धागे बड़े कमज़ोर चुन लेते हैं, हम ! और फिर पूरी उम्र, गाँठ बाँधने में ही निकल जाती है !! (सुरेश)
अर्थोपार्जन / अर्थ-पुरुषार्थ
April 17, 2017
पैसा तो चोर डाकू भी कमा लेते हैं, इसे अर्थोपार्जन कहेंगे; नीति से कमाया धन अर्थोपार्जन नहीं, अर्थ-पुरुषार्थ कहलाता है ।
लोभ / तृष्णा
April 15, 2017
लोभ : वर्तमान का नष्ट न हो जाए, तृष्णा : भविष्य में और और आए ।
संयम
April 14, 2017
यम आने से पहले अपने विकारों के लिए संयम के हथियार लिए, ख़ुद यम बन जाओ ।
शरीर
April 13, 2017
शरीर स्वयं(अपनी आत्मा) का सोचा नहीं करता है, क्योंकि आत्मा, शरीर के लिए परद्रव्य है । (मंजु)
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