Category: डायरी

धर्म का फल

धर्म से जीवन में उतार चढ़ाव तो नहीं रुक सकते, पर उनमें अपने को स्थिर रख सकते हैं ।

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सावधानी

अकेले में भावों को संभालें, दुकेले में वचनों को, समाज में क्रियायों को संभालें । (शशि)

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नेत्रदान

अपने सुकर्मों का फल देखना चाहते हो तो नेत्रदान करें । (सोमेश)

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अहंकार / निंदा

अहंकार से ऊँचा कोई “आसमान” नहीं, किसी की निंदा करने जैसा कोई “आसान” काम नहीं । (ललित)

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धार्मिक क्रियायें

धार्मिक क्रियायें धर्म कैसे ? अहिंसा/वीतरागता धर्म है । पर इनको पाने के लिये, की गई क्रियायें भी धर्म हैं ।

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अंतिम विदा

शांता बहन के अंतिम विदा के समय लिखा था… “यहाँ तक लाने के लिये धन्यवाद, अब आगे का सफ़र हम खुद तय करेंगे” ।

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संसार

संसार मुझ से नहीं चल रहा है, सबसे चल रहा है । मेरे कम होते ही उस जगह को भरने, दूसरा आ जायेगा ।

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चौका

जहाँ चार चीज़ों की शुद्धता रखी जाये (द्रव्य, क्षेत्र, भाव और काल) ।

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मंगल आशीष

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