Category: पहला कदम
बच गये या मर गये
एक प्रसिद्ध फ़िल्म में डाकुओं के सरदार ने तीन डाकुओं को गोली मारी पर तीनों बच गये, तीनों बहुत खुश हुए। अचानक सरदार ने तीनों
सल्लेखना
क्षु. श्री जिनेंद्र वर्णी जी की सल्लेखना आचार्य श्री विद्यासागर जी के सानिध्य में चल रही थी। एक दिन आचार्य श्री सम्बोधन देने देर से
आचार्य श्री विद्यासागर जी का अंतिम प्रवचन से
पंच परमेष्ठी का Short Form –> “ओंकाराय नमो नमः” आचार्य श्री विद्यासागर जी
स्व-पर कल्याण
आचार्य श्री ज्ञानसागर जी* फल (धर्म-पुरुषार्थ) खाकर चले गये। गुठली भी बोई (आचार्य श्री विद्यासागर जी)/ पौधे को संवारा, विकसित भी कर गये। जिस पर
प्रमाद
प्रमाद जीतने के उपाय … विकथा –> शास्त्रानुसार भाषण या मौन। कषाय –> कलुषित भावों की निंदा करें/ क्षमा धारण करें। विषयासक्ति –> लोकनिंदा का
आयु
देव, नारकी तथा भोगभूमिज की आयु बहुत बड़ी-बड़ी, मनुष्य/ तिर्यन्च की कम क्यों ? मनुष्य/ तिर्यन्च संयम ले सकते हैं और संयम लेने के लिये
ज्ञान
ज्ञान तो बस ज्ञान है। माध्यम/ ग्रहण करने वाला सम्यक्/ मिथ्या हो सकता है। मुनि श्री मंगलसागर जी
रोना
अपने गुरु आचार्य श्री विद्यासागर जी की समाधि होने पर शिष्य रोये। मुनि को रोना चाहिये ? नहीं, लेकिन रोओ तो चन्दनबाला जैसा कि भगवान
दोष
1. अतिक्रम –> मन की शुद्धि में कमी। 2. व्यतिक्रम –> मन से मर्यादा उलंघन। 3. अतिचार –> अज्ञान/ प्रमादवश विषय में प्रवृत्ति। 4. अनाचार
द्वितियोपशम सम्यक्त्व
द्वितियोपशम सम्यक्त्व के साथ कौन से स्वर्ग में जाते हैं ? पहले से लेकर सर्वार्थसिद्धि तक, किसी में भी। निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
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