Category: पहला कदम

सिद्ध

सिद्धों के गुणस्थान क्यों नहीं ? गुणस्थान मोह तथा योग से निर्धारित होते हैं। सिद्धों में दोनों का अभाव सो गुणस्थानों के परे। लेकिन गुण

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भगवान की भाषा

भगवान की भाषा कौन सी भाषा जिसमें कम्युनिकेशन स्थापित होता है ? भगवान को तो 18 मुख्य तथा 700 अन्य भाषा में सुना/ समझा जाता

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विसंयोजन / संक्रमण / उद्वेलना

विसंयोजना…विसंयोजना में अनंतानुबन्धी का बाकी तीन कषायों में परिवर्तन,यह सिर्फ अनंतानुबन्धी की ही। संक्रमण…संक्रमण में द्रव्य वापस नहीं होता, यह 148 प्रकृतियों का। उद्वेलना… मिथ्यात्व,

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द्रव्य / पर्याय

अभव्य में केवलज्ञान… शक्ति रूप। भव्य में केवलज्ञान…..अभिव्यक्ति रूप । द्रव्यार्थिक नय… ठर्रा मूंग। पर्यायार्थिक नय…. केवलज्ञान प्रकट नहीं। द्रव्य महत्त्वपूर्ण नहीं, पर्याय महत्त्वपूर्ण है।

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जीव

संसारी जीव… जो दु:ख से डरे और सुख की इच्छा करे। (श्री आत्मानुशासन… आचार्य श्री गुणभद्र स्वामी) जीव… चेतना/ ज्ञान/ दर्शन युक्त। मुनि श्री प्रणम्यसागर

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समवसरण में केवलज्ञान

समवसरण में केवलज्ञान उत्पन्न हो सकता है। भरत चक्रवर्ती के सेनापति जयकुमार भगवान आदिनाथ के 71वें गणधर थे। उनको मोक्ष आदिनाथ भगवान से पहले हुआ

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पुण्यानुबंधी / पापानुबंधी

पुण्यानुबंधी करने वाले जीव के संपर्क में आने वाले भी पुण्य का अनुबंध करने के लिए प्रेरित होने लगते हैं। ऐसे ही पापानुबंधी वाले के

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निमित्त

“घी बनावे मालपुआ, नाम बहू का होय।” हालांकि घी आदि में उपादान शक्ति है। पर बिना बहू (निमित्त) के क्या स्वादिष्ट माल बन पायेंगे!! क्षुल्लक

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तपादि

तीर्थदर्शन/ तपादि भाग्य से नहीं, भाग्य तो औदयिक है। तपादि तो क्षयोपशम से होते हैं। निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी

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उपकार

सबसे ज्यादा उपकार तो हम पर एकेन्द्रिय जीव ही करते हैं। मनुष्य सबसे ज्यादा अपकार/ दोहन इन्हीं एकेन्द्रियों का करता है। लेकिन जो व्यक्ति दूसरों

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मंगल आशीष

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September 6, 2026

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