Category: पहला कदम
मूलगुण
आचार्यों के मूलगुणों में 10 धर्म लिए, मुनियों के लिए क्यों नहीं ? आचार्यों को संघ चलाना होता है। उसमें क्रोध आदि आने की संभावना
सूक्ष्म
सूक्ष्म जीवों को कोई कुचल नहीं सकता। यदि हम भावों से सूक्ष्म बन जाएँ तो कोई भी हमको आहत नहीं कर सकता है। चिंतन
अशुभ / शुभ / अशुद्ध
जब अशुभ भाव आयें तब चिंतन करें… मैं तो शुद्ध आत्मा हूँ। शुभ होने का घमण्ड आये तो आत्मा के अशुद्ध पर्याय का। क्षु. सहजानन्द
गोत्र
राजा श्रेणिक के नरक आयुबंध के समय नीच-गोत्र बंध हो रहा था। मरण के समय उच्च-गोत्र बंध क्योंकि वे चौथे गुणस्थान में थे। नरक गये
दिव्यध्वनि
दिव्यध्वनि से ज्ञान तो मिलता ही है। इससे आहारदान भी क्योंकि भूख नहीं लगती। औषधि दान भी, क्योंकि बीमारी नहीं आती। अभयदान, क्योंकि वहाँ डर
पाप
पाप भी दो रूप –> विनाश रूप। विकास रूप/ समाज की मान्यता प्राप्त। जैसे कानून के तहत फाँसी, सूकर शेर को मारकर ५वें स्वर्ग गया,
श्रावक
आचार्य श्री विद्यासागर जी के दर्शन करने एक धनाढ्य व्यक्ति आये। आचार्य श्री –> सेठ जी आ गए ? सेठ –> सेठ नहीं महाराज, भक्त।
दृढ़ता
जिनके अंदर दृढ़ता होती है, वे ही देशव्रत/महाव्रत ले पाते हैं और उन्हें पाल पाते हैं। पर यह भी देखा गया है कि कुछ लोग
अरिहंत के निर्जरा
13वें गुणस्थान में आखिरी अंतर्मुहूर्त को छोड़कर कथंचित सविपाक निर्जरा ही मानी जाएगी। चिंतन
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