Category: पहला कदम
वैयावृत्ति
वैयावृत्ति अंतरंग तप क्यों ? क्योंकि इसमें मन की ग्लानि पर विजय, दूसरों के गुणों के प्रति आदर और मान गलन होता है। निर्यापक मुनि
द्रव्य / तत्त्व
जीव द्रव्य अनन्त हैं, जीव तत्त्व एक। मुनि श्री प्रमाणसागर जी
मैनासुन्दरी
इनके तो नाम में ही इनकी महानता छिपी है… “मैं ना सुन्दरी” !! मुनि श्री मंगलानन्द सागर जी
श्री कृष्ण जी
श्री कृष्ण जी की तीर्थंकर प्रकृति बंध गयी है, यह अभी निर्णीत नहीं है। निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
अंतरात्मा
आचार्य वीरसेन स्वामी जी की मनोरंजक/ विनोदपूर्ण युक्ति –> सिद्ध भगवान को बहिरात्मा कह सकते हैं क्योंकि वे कर्म रूपी गर्भ के बाहर हैं। संसारी,
रागद्वेष
रागद्वेष में वासना आ जाती है, जो संसार बढ़ाने में निमित्त है। लेकिन रागद्वेष की एक समय की पर्याय वासना का रूप नहीं लेती। क्षु.
अकृत्रिम जिनालय
अकृत्रिम जिनालयों की पद्मासन मूर्तियाँ 500 धनुष की। प्रश्न… 500 धनुष शरीर या मूर्ति ? नंदीश्वर द्वीप पूजा में 500 धनुष “तन” लिखा है यानी
नारियल
नारियल को श्रीफल क्यों कहते हैं ? जटाएँ हटाना –> केशलोंच का प्रतीक। जटाएँ हटने पर 3 आँखें दिखती हैं जो रत्नत्रय का प्रतीक हैं।
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