Category: पहला कदम
प्रदेशत्व/आकार
प्रदेश है तो आकार होगा, चाहे प्रदेश एक ही क्यों न हो। सिद्धों के भी आकार होते हैं। हर द्रव्य का आकार होता है। निर्यापक
एकेन्द्रिय
इन जीवों में बाढ़, भूकम्प आदि उनका आक्रोष/उनकी कराहना है। उन ज्यादतियों के प्रति जो मनुष्य उन पर (उनके उपकारों के बदले) हर समय करते
मनुष्य भव
मनुष्य भव तो सेतु है (सब भवों को मिलाने/ ले जाने वाला)। सेतु पर मकान नहीं बनाये जाते/ बनते हैं। (विडम्बना… मनुष्य की कोशिश स्थायी
संसार
जन्म, बुढ़ापा, बीमारियाँ और मृत्यु दुःख यानि संसार ही दुःख है। समणसुत्तं गाथा – 55
चार हाथ
खिड़की से 4 हाथ तक हरियाली दिखायी देती है, जंगलों में 4 K.M. आचार्य श्री विद्यासागर जी से एक वृद्ध ने शिकायत कि उन्हें दिखाई
जीवन
जीवन बस यही है, अभी है, न भूत में न भविष्य में। दोनों अनंत (+ अनुबंध = अनंतानुबंधी)। भविष्य उधारी जैसा, लौट कर वापस आये
आयुबंध
पहले चिंतन किया था की आयु के निषेक कम होते होते वृद्धावस्था में इतने कम हो जाते हैं कि जरा सा झटका आते ही पूरे
बंधन
क्या धर्म के नियम बंधन नहीं ? बंधन दो प्रकार के… जो पराश्रित करें/ दुःख दें, जैसे सांसारिक। दो… जो स्वआश्रित करें/ सुख दें, जैसे
शिथलाचार
श्री कषायपाहुड में आचार्य कुन्दकुन्द स्वामी ने कहा है… उच्च साधना वाले तथा हल्की साधना वालों को एक श्रेणी में नहीं रखना चाहिये। उच्च साधना
भक्ति
भक्ति करने से गुणों से जुड़ जाते हैं, प्रसन्नता/ विनम्रता आती है। जिसकी भक्ति की जाती है उसके गुण आने लगते हैं। बहुश्रुतवान की भक्ति
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