Category: पहला कदम
अज्ञान
ज्ञान के पहले “अ” लगने पर अज्ञान। जीव के पहले “अ” लगने पर “अजीव। सो अज्ञान का संबंध अजीव से हुआ। जितनी अजीव की जानकारी,
एकेंद्रिय
पाँचों एकेंद्रिय हमारे जीवन के आधार हैं। विडम्बना –> सबसे ज्यादा दोहना/ विराधना इन्हीं की करते हैं। हम तो इनसे क्षमा माँगने योग्य भी नहीं
पापी / पुण्यात्मा
स्वर्ग 19 (16+3), नरक 7 ही, तो क्या पुण्यात्मा ज्यादा पापी कम होते हैं ? पुण्यात्माओं के महल आदि ज्यादा बड़े-बड़े होते हैं। नारकी एक-एक
पहाड़ों की ऊँचाई
विदेह, भरत तथा ऐरावत क्षेत्रों में पहाड़ 5 हजार धनुष से ज्यादा ऊँचे नहीं होते। इसलिए भगवान जब विहार करते हैं तो ये रुकावट नहीं
सदवस्थारूप उपशम
सदवस्थारूप उपशम… सत्ता के कर्मों का असमय में उदय में नहीं आने देना। श्री मरणमंडिका
कषाय
हम सम्यग्दृष्टि हैं या मिथ्यादृष्टि, कैसे पता लगे ? यदि समय के साथ कषाय घट रही है तो सम्यग्दर्शन हो गया या होने वाला है,
रसी
सप्ताह में 6 दिन रसों का त्याग बताया (मंगलवार – मीठा, बुधवार – घी, बृहस्पतिवार – दूध, शुक्रवार – दही, शनिवार – तेल, रविवार –
दुस्वर
ज्ञानी के भी दुस्वर कर्मोदय के समय, उनकी हितकारी बात भी सुनना नहीं चाहते। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थ सूत्र – 8/11 )
निकांक्षित अंग
अनैतिक उपलब्धियों/ भोगविलास की इच्छा करना ही निकांक्षित-अंग में दोष है। सामान्य/ सांसारिक इच्छा रखने में दोष नहीं। निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
रस / नामकर्म
वनस्पतिकायिक जीवों के शरीर से खट्टे, मीठे, कषायले, कड़वे, तीखे रस आते हैं। त्रस जीवों के शरीर में भी इन जीवों का रस रहता है।
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