Category: वचनामृत – अन्य
प्रभाव
जीवन में तीन का सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ता है । मौसम माहौल मानसिकता मुनि श्री मंगलानंद जी
कर्मफल
3-4 उपवास के बाद भी उल्टी में साबुत चावल निकलते देखे जाते हैं । पुराने पुण्य/पाप यदि पच न पायें, तो अगले जन्मों में फल
विरोध
कचरे की गाड़ी निकलने पर कोई ऐतराज नहीं करता, पर ऊपर वाले का जलूस निकलने पर, नीचे वाले लोग, एक दूसरे का विरोध करते हैं
सही राह
सही राह पर चलने वाले क्या पाते हैं, यह तो पता नहीं, पर कुछ खो नहीं सकते, यह निश्चित है । मुनि श्री कुंथुसागर जी
दिगम्बरत्व
नग्न वह है, जिस पर कपड़े न हों । दिगम्बरत्व नग्नता नहीं है, दिग हों अम्बर जिसके, वे दिगम्बर हैं । मुनि श्री प्रमाणसागर जी
धर्मनीति/राजनीति
अपने गुनाह को स्वीकार करने वाले को धर्मनीति गले लगाकर शाबाशी देती है, राजनीति सज़ा । मुनि श्री सुधासागर जी
प्रकृति
गाय का दूध निकालना – प्रकृति, दूध का फटना – विकृति, दूध से घी निकालना – संस्कृति । प्रकृति को विकृति से बचायें, संस्कृति की
दान/भोग/नाश
केला खाने के बाद छिलका गाय को, तो दानी । कचरे में, तो भोगी । सड़क पर, तो नाशी । कम से कम छिलके का
श्री राम
सबसे ज्यादा पूज्य राम को क्यों माना गया है ? क्षमाभाव की उत्कृष्टता की वजह से । कैकई से ही आर्शीवाद मांग रहे थे कि
क्षमा-दिवस
इस साईट के प्रणेता- गुरूवर मुनि श्री क्षमासागर जी महाराज का आज समाधिमरण हो गया । पूज्य मुनि श्री ने पिछले दो दिनों से आहार
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