Category: वचनामृत – अन्य
अंत
भोजन के अंत में सफेद चावल आते हैं तब भोजन समाप्त हो जाता है । सफेद बालों के आ जाने पर तो भोगना समाप्त कर
भक्ति
राग सहित भक्ति, वैरागी बनाती है । वैरागी की भक्ति, वीतरागी । मुनि श्री विमर्श सागर जी
संगति
खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है । जैसी संगति वैसे बनोगे । मंदिर जाओगे भगवान जैसे, गुरूओं की सेवा में रहोगे त्याग/संयम के भाव
अभिशाप
अपनों का अभिशाप बहुत बड़ा, पर अपना अभिशाप सबसे बड़ा – इंद्रियों/धन/बल के दुरुपयोग से मिलता है ये अभिशाप मुनि श्री सुधासागर जी
दु:ख
संसार में दु:ख नहीं होते तो मोक्षमार्ग भी नहीं होता । मुनि श्री सिद्धांतसागर जी
वृद्धावस्था
आजकल प्राय: वृद्ध लोगों की अवहेलना होती देखी जाती है, पहले तो नहीं होती थी !! पहले वृद्ध , बच्चों के बड़े होते ही उन्हें
मनुष्य पर्याय
शिष्य ने गुरू को सोने का पात्र दिया, उन्होंने उसके बदले मिट्टी का पात्र वापस कर दिया । उसने बाहर आकर देखा कि उसका घोड़ा
ज्ञान/आचरण
खराब आचरण से खुद को नुकसान होता है । गलत ज्ञान से पूरे समाज को, क्योंकि ज्ञान दूसरों को परोसा जाता है । आचार्य श्री
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