Category: वचनामृत – अन्य
आलोचक/प्रशंसक
आलोचक कैंची हैं जो बस काटते ही रहते हैं । प्रशंसक सुई हैं जो सिलते/जोड़ते रहते हैं । कैंची को दर्जी पैरों में रखता है,
चारित्र
चंदन की खुशबू कुछ दूर तक ही जाती है, चारित्र की खुशबू देवलोक तक जाती है । आचार्य श्री महाश्रमण जी
संतुष्टि/सफलता
संतुष्टि प्रकाश है, सफलता छाया है । संतुष्टि पा ली तो सफलता/छाया पीछे पीछे आयेगी ही । मुनि श्री अनुभवसागर जी
सफलता की कुंजी
Goal का स्पष्ट निर्धारण । गति बनाए रखना । गुरू/सत्संगियों से guidance लेना । अनुकम्पा के भाव रखना । आचार्य श्री महाश्रमण जी
पुण्य
वैभव और सफलता, मेहनत और ज्ञान से ही नहीं मिलती, वरना मज़दूर और पंड़ितों के पास होतीं । इनके मिलने का मुख्य कारण है –
धीरज/अधीरता
“धीरज” कमजोर की ताकत है और “अधीरता” ताकतवर की कमजोरी । मुनि श्री प्रमाणसागर जी
अहं
अहं करना ही है तो अपने स्वरूप का करो, अहं से अर्हम (अरहंत/भगवान) बन जाओगे । मुनि श्री प्रमाणसागर जी
मध्यम रास्ता
Projectile Motion अधिक से अधिक किसी वस्तु को दूर फेंकने के लिये Sin 2 Ø से Calculate किया जाता है। इसमें यदि Ø = 45
जीवन-यात्रा
गिलास भर के चलना है। पानी छलके नहीं और गिलास भी पूरा भरा रहे। मुनि श्री अनुभव सागर जी ( जीवन में Balancing बहुत महत्वपूर्ण
अपशब्द
तुमने गाली क्यों दी ? उसने पहले मुझे गाली दी, इसलिये मैंने उसे दी। जिनकी पाचन शक्ति कमज़ोर होती है वे अपशब्दों का प्रयोग करते
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