Category: वचनामृत – अन्य

उत्तम सत्य

चारों कषायों (क्रोध, मान, माया, लोभ) के समाप्त करने पर ही प्रकट होता है, अन्यथा लाग-लपेट आ ही जाती है । आज का धर्म अनाथों

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उत्तम शौच

पवित्रता का नाम शौच है । एक संत सबको आशीर्वाद देते थे – ‘मनुष्य भव:’। पूंछने पर बताया – आकृति तो तुम लोगों की मनुष्य

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उत्तम आर्जव

कपट नहीं करना या मन की सरलता को आर्जव कहते हैं । बच्चा चाहे आदमी का हो या जानवर का अपनी निष्कपटता के कारण सबको

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उत्तम मार्दव

मान का ना होना मार्दव धर्म है । क्षमा पहला धर्म, एक Message छोड़ गया – ‘क्ष’ से क्षय करें, ‘मा’ से मान को ।

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उत्तम क्षमा

उत्तम क्षमा :- क्रोध की परिस्थितियां मिलने पर भी गुस्सा ना करना । हजार चिनगारियों के पास एक व्यक्ति भी नहीं आता, शहद की एक

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देवदर्शन

जो वस्तु देखी ही नहीं या यदा-कदा देखोगे, तो वैसे बनोगे कैसे ? क्षु. श्री गणेश वर्णी जी

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होनी/ अनहोनी

होनी और अनहोनी तो टलती नहीं , उस समय अपना विवेक प्रयोग करें । मुनि श्री विद्याभूषण जी

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भक्त

वक्त पर जो भक्त बनता है, वो विभक्त होता है । मुनि श्री योगसागर जी

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मौन

मौन रखना भी सत्य बोलना है – कम से कम खाते समय तो मौन रहें। मुनि श्री आर्जवसागर जी

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मंगल आशीष

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