Category: वचनामृत – अन्य
सपना
सपना देखना आसान, पूरा करने में ज़िंदगी भी कम पड़ जाये । ज़िंदगी को ही सपना मान लो तब सारे झंझट ही समाप्त । मुनि
सौगंध
गंध खायी नहीं जा सकती, ऐसे ही जिसकी सौगंध ली जा रही हो जैसे “भगवान की”, तो उसे भी तो खा नहीं सकते । अत:
हौंसला
चिड़ियाँ अपने बच्चों को “घौंसला” नहीं देतीं, सिर्फ ऊँचाइयाँ पाने का “हौंसला” देती हैं । मनुष्य सिर्फ घौंसले और घौंसले ही देते हैं । मुनि
एकला
अकेला चना भाड़ तो नहीं फोड़ सकता पर झाड़ जरूर उगा सकता है । शर्त है कि बीज अपना बीजपने का अहं छोड़ दे ।
घड़ी
दो प्रकार की – 1. कलाई की 2. मुसीबत की मुसीबत की खराब होने पर थोड़े समय में ठीक होगी ही । कलाई वाली ठीक
भगवान
कुछ मतानुसार भगवान पापियों का नाश करने आते हैं, अन्य मतानुसार पुण्यात्माओं के उद्धार के लिये, पर वीतराग धर्मानुसार अपने अंदर बैठे कर्मरूपी आतंकी का
अनित्य
थोड़ी दूर/देर की यात्रा के लिये रिजर्वेशन नहीं कराते हैं, विषम परिस्थितियाँ भी झेल लेते हैं कि थोड़ी देर की ही तो बात है ।
घ्रणा
कुबड़े से घ्रणा करने में बहुत दोष है, क्योंकि उसके शरीर से घ्रणा की जा रही है । हत्यारे से घ्रणा करने में कम दोष
आत्मा / भगवान
जो शरीर में आत्मा नहीं देख पाते, वे ही मूर्ति में भगवान नहीं देख पाते । और वे ही शरीर/भोगों को पुष्ट करने में लगे
आधार
जलते हैं घी/बाती, नाम दीपक का क्यों ? क्योंकि दीपक, घी/बाती को आधार देता है, और आधार का महत्व क्रियावान से अधिक होता है ।
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