Category: वचनामृत – अन्य

स्वतंत्रता-दिवस

देश के पतन का कारण … स्वतंत्रता के पहले की कर्म-भूमि को हमने स्वतंत्रता के बाद भोग-भूमि में बदल दिया है । मुनि श्री प्रमाण

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नौकरी और धर्म

नौकरी के साथ धर्म का सामंजस कैसे बिठायें ? नौकरी को धर्म रूपी शरीर का अंग समझ कर । मुनि श्री सुधासागर जी

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मान

सबसे घटिया वह मान – जो दूसरों का अपमान करे । मुनि श्री प्रमाणसागर जी

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धन और धर्म

धन से धर्म कमाना (करना) अच्छा, धर्म से धन कमाना बुरा । अत: धन बुरा नहीं, यदि धन से धर्म कमाया जाय तो । मुनि

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सच्चा गुरु

सच्चा गुरु वह जो शिष्यों के अनुसार ना चले (उन्हें खुश रखने), बल्कि शिष्यों को अपने/आगम के अनुसार चलाये । मुनि श्री सुधासागर जी

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भक्ति से तृप्ति

जैसे मिठाई के नाम से ही मुँह में गीलापन आ जाता है/ तृप्ति सी लगने लगती है, ऐसे ही भक्ति से भगवान आ नहीं जाते,

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समता भाव

यदि सामने वाला समता भाव के योग्य न हो तो ? समता भाव अपनी योग्यता के अनुसार धारण किया जाता है न कि सामने वाले

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धर्म

धर्म को Washing Powder ना मानें कि पहले प्रयोग करें फिर विश्वास करें, बल्कि बीमा जैसा मानना – “जीवन के साथ भी, जीवन के बाद

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अभ्यास

व्यवसाय को नौकरी से अच्छा इसलिये कहा… क्योंकि यह Running है (मरने के बाद भी बच्चों को मिलेगा) । ज्ञान, तप, नियम ऐसे ही बेहतर

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भाग्य / पुरुषार्थ

भाग्य बीज है, पुरुषार्थ बोना । उचित फसल (फल) लेने के लिये दोनों आवश्यक हैं । मुनि श्री सुधासागर जी

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मंगल आशीष

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