इनमें चमत्कार नहीं सुने, चाहे मंदिर सोने/चांदी के ही क्यों न हों ।
कारण ?
1. घरों में इतनी पवित्रता नहीं रह सकती,
2. बहुत कम लोगों की भक्ति, इन मंदिरों से जुड़ पाती है ।
मुनि श्री सुधासागर जी
The tendency to follow the path of least resistance guarantees failure in life.
इसीलिए भगवान महावीर ने महलों की आरामदायक जिंदगी छोड़ कर जंगलों का सबसे कठिन रास्ता चुना और सफलता प्राप्त कर मोक्ष पाया ।
पहले “साइकिल” की चाह,
फ़िर उसमें जुड़ गई मोटर यानि “मोटर साइकिल”,
फिर साइकिल तो पूरी निकाल दी “मोटर” रह गई ।
चिंतन
सपना देखना आसान,
पूरा करने में ज़िंदगी भी कम पड़ जाये ।
ज़िंदगी को ही सपना मान लो तब सारे झंझट ही समाप्त ।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
Prayer should be the key of the morning
and
lock of the evening.
किसी के/सबके भले के लिए शांति की भावना भाने से उसका/सबका भला हो सकता है, क्योंकि उसके जीवन में परेशानी आने से हमको अशांति होती है ( यदि उनसे हमारा संबंध हो तो )
यदि उनसे हमारा संबंध नहीं है तब हमारे दया के भाव होने से हमारा भला तो होगा ही ।
हर “वार” (दिन), “रविवार” होता है (Relaxed Mood),
उनका…
जिनका जीवन व्यवस्थित होता है ।
ऐसी आपदा में शांति-धारा से तो शांति प्राप्त होती, फिर मंदिर क्यों बंद किये गये ?
आग लगने पर जल-धारा डालने से शांति होती है, पर मंदिरों में संक्रामक बीमारी फैला कर फिर शांति-धारा करना कहाँ की बुद्धिमत्ता होती !
मुनि श्री प्रमाण सागर जी (29.3.20)
गुरु/धर्म कह-कह कर थक गए कि… “करो ना, करो ना”(*),
यदि कर लिया होता, तो आज यह न कहना पड़ता कि…
“करो ना”(**)
(*)…..जो करने योग्य/ करना चाहिए था
(**)…बाह्य/ क्रियात्मक मत करो
चिंतन
मैं क्या जानता ?
नहीं जानता,
गुरु जानते ।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
गंध खायी नहीं जा सकती, ऐसे ही जिसकी सौगंध ली जा रही हो जैसे “भगवान की”, तो उसे भी तो खा नहीं सकते ।
अत: सौगंध नहीं खाना चाहिये ।
मुनि श्री सुधासागर जी
संघर्ष एक ऐसा केन्द्र है
जहाँ….
हताशा का व्यास कितना भी बढ़े
लेकिन….
संभावनाओं की परिधि कम नहीं होती….!
(सुरेश)
The river ending in the sea is not the end of story. The sea water again evaporates and rains to become a river.
Moral:
See your life as an ongoing process where achieving a goal is not the end of story but the start of a new one.
(Suman Lata)
असन* करना है तो आसन करो (शरीर को एक अवस्था में स्थिर रखना)।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
*धर्म साधना
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