चिड़ियाँ अपने बच्चों को “घौंसला” नहीं देतीं,
सिर्फ ऊँचाइयाँ पाने का “हौंसला” देती हैं ।
मनुष्य सिर्फ घौंसले और घौंसले ही देते हैं ।

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

धार्मिक कार्यों में दान भरी ज़ेब वाले ही करते हैं,
बिना ज़ेब (साधु) वालों की प्रेरणा/अशीर्वाद से,
खाली ज़ेब वाले तो खाली (ख़राब – ख़राब) बातें ही करते हैं ।

शानदार कोठी के बाहर बैठकर मालकिन भीख मांगती थी ।
कारण ?
बेटा चैक भेजता था उसे वह दीवार पर सजाती जाती थी ।
हम भी तो बहुमूल्य शास्त्रों की पूजा करते हैं, पर उन्हें कभी Encash किया ?

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