गुरु-परम्परा के ऊपर आगम-परम्परा होती है ।
आगम-परम्परा में भी,  सबसे पुरानी वाली को मान्य मानें ।

मुनि श्री सुधासागर जी

पहले मंत्रों को सिद्ध करके काम करवाते थे,
फिर तंत्र विद्या आयी ;
ये दोनों भावनात्मक थे ।
अब यंत्र की बहुलता है जैसे क्रेन से बड़े बड़े सामान उठाना,
यह द्रव्यात्मक है ।

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April 8, 2022

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