ध्रतराष्ट्र को दिखता नहीं था, पर जब भी सिंहासन की ओर मुँह करते थे उस पर दुर्योधन ही बैठा दिखता था ।

जो पूर्णमासी नहीं मनाते, उनके जीवन में अमावस्या नहीं आती है ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

किसी ने पूछा – भगवान दु:ख दूर करते हैं ?
साधु ने कहा -ना रे ! भगवान किसी का दुःख दूर नहीं करते ! यदि दु:ख दूर ही करना होता, तो देते ही क्यों ?

फिर दुःख दूर कौन करता है ?
साधु – भगवान का “नाम” दु:ख दूर करता है । उनके “स्मरण” में मन का “रमण” होने लगे तो दुःख का “मरण” निश्चित है!

???????? सुरेश ????????

भक्ति हमें आलसी या अहंकारी नहीं बनाती, बल्कि सच्चा पुरुषार्थ करने की प्रेरणा देती है ।

गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी

एक खेत में देवता रहता था ।
किसान उसमें खेती करने गया तो दोनों में साझेदारी का सौदा हो गया ।
देवता ने नीचे की फसल मांगी तो किसान ने बाजरा बो दिया, देव ने अगली बार ऊपर की मांगी तो किसान ने मूँगफली बो दी ।
देव ने ऊपर तथा नीचे की दोनों में मांगी तो उसने मक्का बो दी ।

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