ऐसी बुद्धि वाले Valley की Shape को ही पहाड़ मानने लगते हैं (Shape तो”V” की ही है, उल्टी ही सही )
समय पर किया गया कार्य – सदुपयोग
समय निकल जाने के बाद किया गया कार्य – दुरुपयोग
अनुमान अप्रत्यक्ष, अनुभव प्रत्यक्ष ।
कभी कभी अनुमान अनुभव से ज्यादा कारगर हो जाता है, जैसे ज़हर खाने से मृत्यु हो जाती है ।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
The PAST,the PRESENT and the FUTURE are really one: they are TODAY
माँ (श्रीमती मालतीदेवी) के देहावसान पर….
वेदन हो पर वेदना न हो,उसे निर्जरा (कर्मों को काटना) कहते हैं ।
लालमणी भाई
पाप – आंतरिक, अधर्म तथा भावनाओं से,
अपराध – प्रकट, क्षेत्र और काल से परिभाषा बदलती रहती है,
इसका फल बाद में निर्धारित किया जाता है, जबकि पाप का भावना के साथ ही ।
ज्ञानी की हर क्रिया में ज्ञान झलकता है – बोलने, चलने, देखने, सुनने में, चाहे परिस्थिति अनुकूल हो या प्रतिकूल, चाहे वस्तु अच्छी हो या बुरी ।
मुनि श्री सुधासागर जी
ज़िदगी के नियम भी कुछ
कबड्डी के खेल जैसे हैं ।
सफलता की लाइन टच करते ही,
लोग आपके पैर खींचने लग जाते हैं ।
???????? सुरेश ????????
कल्पना उसकी ही की जा सकती है जिसे कभी देखा हो ।
पत्थर की मूर्ति में यदि आज हम भगवान की कल्पना कर पाते हैं तो निश्चित मानिये – पिछले जन्मों में हमने भगवान के साक्षात दर्शन ज़रूर किये होंगे ।
वैज्ञानिक को अद्भुत (संसारिक) सिद्धांत मिल गया तो निर्वस्त्र होकर सड़क पर दौड़ता हुआ युरेका युरेका पुकारने लगा ।
दिगम्बर साधू को तो अद्भुत आत्मिक अनुभूति मिल जाती है, उसे कपड़ों की क्या सुधबुद !!
वह तो शरीर से भी अलग थलग हो जाता है ।
मुनि श्री सुधासागर जी
दो मित्र नित्य नदी पर जाकर डुबकी लगाते थे ।
Deal थी कि सिक्के पहले मित्र को मिलेंगे और सूरज (जिसका प्रतिबिम्ब नदी में दिखता था) दूसरे को ।
थोड़े दिनों में पहला तो धनवान हो गया और दूसरा पागल ।
क्या हम भी छाया रूपी खुशी के पीछे तो अपना जीवन बर्बाद नहीं कर रहे हैं !
चिंतन
चील ऊँचे पेड़ों पर घोंसले बनाती है ।
बच्चे बड़े हो जाते हैं तब घोसलों को तोड़ देती है ताकि बच्चे उड़ान भर सकें ।
(डॉ.पी.एन.जैन)
गुरु भी शुरु में आश्रय देते हैं, बाद में स्वाबलंबी बनाने, कठोरता से अलग कर देते हैं ।
स्कूल में तीन बकरी घुस आयीं, एक बच्चे ने उनपर 1, 2, 4, नं लिख दिये ।
सुबह तक उन बकरियों ने स्कूल में खूब गंदगी कर दी । सब ने मिलकर बकरियों को पकड़ कर बाहर कर दिया, पर उन्हें ‘3’ नं की बकरी नहीं मिली । सारी पढ़ाई बंद करके सब ढ़ूँढ़ने लगे, शाम हो गयी पर ‘3’ नं बकरी नहीं मिली ।
हम भी जीवन की शाम होने तक उस अज्ञात को ही खोजते रहते हैं/जिसमें सुख नहीं है, उसमें सुख खोजते रहते हैं ।
(डॉ.अमित)
परछाई से कभी मत डरिये,
उसकी उपस्थिति का अर्थ है…
कि
आस-पास कहीं रोशनी है !
(सुरेश)
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