
गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी
जल और मोह जहाँ गहरा होता है, बहाव उधर ही हो जाता है/वहीं ठहर जाता है, ठहरने से सड़ने लगता है ।
खुद का तथा जिससे मोह की तीव्रता होती है, दोनों का नुकसान करता है ।
चिंतन
महाराणा प्रताप ने जंगल में घास की चार रोटियाँ बनायीं, तीन कोई जानवर उठा ले गया ।
चौथी रोटी दान की थी, बच्चा तक भूखा रो रहा था पर दान की वह रोटी बच्चे को नहीं दी गयी ।
उसी समय भामाशाह ने अपार धनराशी लाकर राणा प्रताप को सौंप दी ।
इसे दान का प्रताप ना कहें तो क्या कहें !!
मुनि श्री सुधासागर जी
संसार में असंतुष्ट प्राणी वैराग्य लेने के बाद भी उन चीजों को पाने में लग जायेगा, जिनकी कमी वह संसार में अनुभव करता था ।
पर अनासक्त भाव दोनों क्षेत्रों में लाभकारी होता है ।
गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी
आज गुरुदेव का समाधि-दिवस है ।
जलेबी सिर्फ़ मीठी ही नहीं, एक महत्वपूर्ण संदेश भी देती है।
खुद कितने भी उलझे रहो, पर दूसरों को हमेशा मिठास दो ।
(नितिन-देहली)
You have ENEMIES ?
Good,
That means you’ve stood up for something, sometime in your life.
☆☆☆☆☆☆☆☆☆☆☆☆☆☆☆☆☆☆
लेटे हुए बच्चे का तो डाकू भी दुश्मन नहीं होता !
5 छिद्रों वाले घड़े को कैसे भरेंगे ?
गुरु ने मुस्कान के साथ उत्तर दिया -पानी में ही डूबा रहने दो ;भरा ही रहेगा !
इसी तरह हमारी 5 इन्द्रियाँ परमात्मा में ही डूबी रहेंगी तो संसार क्या बिगाड़ लेगा !
तन की जाने, मन की जाने,
जाने चित की चोरी ।
(धर्मेन्द)

(दिव्या)
यह सत्य पाने से नहीं, असत्य को पहचानने से होता है ।
सत्य तो आत्मानुभूति (केवलज्ञान) होने पर प्राप्त होता है ।
प्रार्थना – गुणों का गान,
विनय – गुणों का बहुमान/अपने में लेने के भाव ।
मीठा मीठा सुनोगे तो सुगर बढ़ जायेगी,
करेला/मिर्ची खाओगे तो घट जायेगी (विष से ही विष कटता है) ।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
कद बढ़ा नहीं करते ,
ऐड़ियां उठाने से,
ऊँचाइयाँ तो मिलती हैं,
सर झुकाने से !
(सुरेश)
पाप परिस्थिति नहीं कराती, मन:स्थिति कराती है ।
जिस परिस्थिति में रागी पाप करता है, उसी परिस्थिति में वैरागी पुण्य करता है ।
क्षु. श्री ध्यानसागर जी
एक तरफ भगवान के दर्शन हों, दूसरी ओर चींटी की रक्षा तो पहले चींटी की ओर देखो ।
चींटी की ओर देखोगे तो भगवान बनोगे,
भगवान की ओर देखोगे तो (यदि चींटी मर गयी तो !) चींटी बनोगे ।
मुनि श्री सुधासागर जी
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