अकारण सुख प्राप्ति को आनंद कहते हैं।
(श्रीमति शर्मा)
कारणों में सुख ढूढना बंद कर दें, तब आत्मा का स्वाभाविक आनंद स्वत: ही आने लगेगा।
कर्मोदय के विपरीत परिणामों को रखना पुरुषार्थ है ।
अज्ञानी दूसरों पर क्रोध करता है,
ज्ञानी अपने पर ।
जीवन/संगीत/पूजा सब में उचित अनुपात बहुत जरूरी है, तभी आनंद आयेगा, क्रिया कार्यकारी होगी । अनुपात बिगड़ा, आपात स्थिति आती है ।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
अंतरंग का परिवर्तन सत्संग से ही संभव है ।
परिवर्तन से ही परिवर्धन होता है ।
संत ना बन सकें तो सज्जन तो बन सकते हैं ।
धर्म क्या है ?
अधर्म का अभाव ही धर्म है ।
(और अधर्म को तो हम सब खूब समझते ही हैं)
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
चोर साधुओं के पास इसलिये नहीं जाते, क्योंकि उनके पास वह सब नहीं है जो उन्हें चाहिये ।
यदि हम भी उनके पास नहीं जा रहे है हैं तो हम क्या हुए !!
मुनि श्री सुधासागर जी
पहले समय में पदयात्रा मज़बूरी थी, आज तप/धर्म है ।
धर्म की भावना देर तक चलती है ।
अहिंसा का पालन होता है ।
भाग्य = अलग अलग size के घड़े ।
पुरुषार्थ = अपने अपने घड़ों को कम ज्यादा भरना ।
सौरभ – नोयड़ा
आत्मा कमरा है,
मन खिड़की, जिसके सहारे से आत्मा जानती है ।
दुखी न होना ही, सुखी होना है ।
सुखी रहना ही धर्म है ।।
(धर्मेंद्र)
अपने पराये का भेद ही संसार है ।
असल में ना कोई अपना है, ना पराया;
सब अपने अपने हैं ।
गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी
Pages
CATEGORIES
- 2010
- 2011
- 2012
- 2013
- 2014
- 2015
- 2016
- 2017
- 2018
- 2019
- 2020
- 2021
- 2022
- 2023
- 2024
- 2025
- 2026
- News
- Quotation
- Story
- संस्मरण-आचार्य श्री विद्यासागर
- संस्मरण – अन्य
- संस्मरण – मुनि श्री क्षमासागर
- वचनामृत-आचार्य श्री विद्यासागर
- वचनामृत – मुनि श्री क्षमासागर
- वचनामृत – अन्य
- प्रश्न-उत्तर
- पहला कदम
- डायरी
- चिंतन
- आध्यात्मिक भजन
- अगला-कदम
Categories
- 2010
- 2011
- 2012
- 2013
- 2014
- 2015
- 2016
- 2017
- 2018
- 2019
- 2020
- 2021
- 2022
- 2023
- 2024
- 2025
- 2026
- News
- Quotation
- Story
- Uncategorized
- अगला-कदम
- आध्यात्मिक भजन
- गुरु
- गुरु
- चिंतन
- डायरी
- पहला कदम
- प्रश्न-उत्तर
- वचनामृत – अन्य
- वचनामृत – मुनि श्री क्षमासागर
- वचनामृत-आचार्य श्री विद्यासागर
- संस्मरण – मुनि श्री क्षमासागर
- संस्मरण – अन्य
- संस्मरण-आचार्य श्री विद्यासागर
- संस्मरण-आचार्य श्री विद्यासागर


Recent Comments