सबसे सीधा/शरीफ़ शरीर ही होता है ।
बेशकीमती होते हुए भी प्राय: इसे गंदे से गंदे/साधारण से भी साधारण कार्यों में लगाया जाता है पर ये उफ़ तक नहीं करता ।

सूप बेकार को छोड़ता है – साधु ।
छलनी बेकार को ग्रहण करती है – गृहस्थ ।।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

Archives

Archives

April 8, 2022

September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930