गिरना भी सार्थक हो सकता है, बशर्ते उठते हुये काम की चीज़ लेकर उठें,
जैसे भगवान/गुरुओं की माँओं का गृहस्थी में फंसना ।

मोर मांसाहारी पर पंख साधुओं की पीछी में क्यों ?

गाय अशुद्ध खाती है, पर दूध शुद्ध ।
उसका ही मल अशुद्ध और मांस अभक्ष्य ।

मुनि श्री सुधासागर जी

मन से किया गया कार्य अच्छा होता है, मालिक प्रवृत्ति का होता है ।
मन का किया गया कार्य दु:ख देता है, सेवक प्रवृत्ति का होता है ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

लोग ज़िंदों को गिराते हैं, मुर्दों को उठाते हैं, ये कैसे लोग हैं ?
जो ज़िंदा को गिराते हैं वे मुर्दा होते हैं* और मुर्दा को उठाने वाले ज़िंदा ।

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

* पर वे भूल जाते हैं कि एक दिन वे भी मुर्दा बन, उन सब के कंधों पर ही जायेंगे, जिनके लिये ज़िंदों को गिराया था ।

प्राय: आचरण का अभिप्राय अच्छे काम करने से लिया जाता है, पर करने से भी ज्यादा महत्वपूर्ण है, क्या नहीं करना चाहिए ।

मुनि श्री सुधासागर जी

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April 8, 2022

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