हर कर्म पूजा नहीं होती ।
जो खटकर्म/दुष्कर्म से हटकर सत्कर्म किया जाता है, वह पूजा होती है ।
यूँ ही नहीं होतीं हाथ की लकीरों के आगे उँगलियाँ,
रब़ ने भी किस्मत से पहले महनत लिखी है ।
नौ द्वारन का पींजरा, तामै पंक्षी मौन !
रहत अचम्भा जानिये, जावत अचरज कौन !!
ज़िंदगी पर ड़ाल दी जिसने हकीकत की नज़र,
ज़िंदगी उसकी बेहकीकत हो गयी ।
वैभव का संग्रह पाप है, सदुपयोग पुण्य ।
सुविधाओं का अनियंत्रित उपयोग दुविधा बन जाती है ।
साइकिल चलाने से ज्यादा कठिन है, धीरे चलाना और सबसे कठिन है एक स्थान पर रोके रखना, इसके लिये बहुत प्रयास करना होता है ।
जब संसार ही छूटना अनिवार्य है,
तो बुराई छोड़ने में कठिनाई क्यों ?
भक्ति में संगीत, भावों की बढ़ोतरी में सहायक है;
पर संगीत में अटकें नहीं/भावों को भूलें नहीं ।
चिंतन
विपत्ति में सम्पत्ति देखें ।
स्वर्ण पाषाण को ही कसौटी पर परखा जाता है, पत्थर को घिसने से तो कसौटी ही घिस जाती है/नष्ट हो जाती है ।
सोये हुए शेर से, जगा गीदड़ अच्छा होता है ।
प्रभावना – Short Term,
प्रेरणा – Long Term
परिवर्तन – Permanent
मोह कम कैसे करें ?
आचार्य श्री – (पीछी कमण्ड़ल उठाकर चलते हुये) ऐसे कम करते हैं ।
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