ट्रेन के सुरंग से निकलते समय उसमें अँधेरा हो जाता है, कामकाज ठप ।
पर अंदर की Light जला लो तो डर काहे का !
कामकाज भी चलता रहेगा ।

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

बिना अनुमति दूसरे की चीज़ लेना चोरी,
पर बिना अनुमति, दूसरे की वस्तु के ग्रहण का, भाव भी नहीं करना, अचौर्य – धर्म ।

गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी

बंदर के हाथ हीरा पड़ गया, खाकर देखा, फेंक दिया ।
हीरा रो पड़ा !!
गुरु – मूल्य तभी है जब उसका ज्ञान हो तथा उसका उपयोग हो ।
क्या हम मनुष्य पर्याय का मूल्य जानते हैं ?
यदि जान भी गये हैं तो क्या उसका सदुपयोग कर रहे हैं ??

जितनी व्यवस्थाएँ होंगी, उतनी ही अव्यवस्थाएँ भी होंगी और आपकी अवस्था बदल नहीं पायेगी ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

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April 8, 2022

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