इहभव और परभव के कल्याण के लिये….
कर्म-फल की परवाह करना,
(जैसे ये करने का क्या फल होगा,
ये ना करने का क्या फल होगा)
कर्मसिद्धांत की परवाह करना है ।

मीठे पानी की नदी खारे समुद्र में क्यों गिरती है ?

महत्त्वाकाँक्षा की वजह से,
ऐसे व्यक्तियों का हश्र भी ऐसा ही होता है,
अपना अस्तित्व खो देते हैं ।

सबको अपने अपने गुणों को बढ़ाना चाहिए ।

गुण/अवगुण तो सबमें होते हैं,
पर धर्म से गुणों में स्थिरता आती है जैसे दूध का दही बन जाता है।
धर्म अवगुणों से ऊपर उठा देता है जैसे मक्खन ऊपर आ जाता है ।

चिंतन

सुंदर मोर* कम होते जा रहे हैं,
जो हैं उनकी आवाज़ शोर शराबे में सुनाई नहीं देती है ।

उन्हें देखने/सुनने सुबह जल्दी उठकर, उनके पास जाना होता है।

चिंतन

*अच्छे इनसान/साधु जन

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April 8, 2022

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