एक दोस्त अपने दोस्त के शव को देख कर मुस्कराया !
तो एक बुज़ुर्ग ने कहा “बेटा ! जवान मौत पर मुस्कराते नहीं” !
लड़के ने आँखें साफ़ कीं और बोला… “बाबा क्या बताऊँ, दिल तो खून के आँसु रो रहा है ! लेकिन दोस्त से वादा किया था जब भी मिलेंगे…हँसते हुए मिलेंगे…!”
उसने कहा था… ” मैं जब मर जाऊँ, तो हँसते हुए आना यारो ! क्योंकि उस वक्त मेरे हाथ तुम्हारे आँसु नहीं पोंछ सकेंगे ” !
(डा.अमित)

(Parul-Delhi)
वह तो एक, दो बूंद ले रहा है, आप उसकी जान क्यों लेना चाहते हो ?
वह अज्ञानी है, तुम ज्ञानी/दयावान ।
लता तो प्रारब्धानुसार बनती है;
पर
वह सबल पेड़ को निमित्त लेकर उर्ध्वगमन,
तथा
कुएँ का सहारा लेकर अधोगमन करती है ।
आज परछाई से पूछ ही लिया
क्यों चलती हो मेरे साथ ?
उसने भी हँसके कहा…
“और दूसरा है ही कौन तेरे साथ” ।
क्षमा हमारा स्वभाव है ।
क्षमा शब्द “क्षम” धातु से बना है,
जिसका अर्थ है “सामर्थ्य” ।
जो जितना सामर्थ्यवान होगा, उसे उतना ही क्षमावान होना चाहिए ।
क्रोध शाँत करने के उपाय…
1) सकारात्मक सोचें
2) क्रोध में ईंधन न डालें
3) चुप रहें ।
गुरु मुनि श्री क्षमा सागर जी
हम पर 1 जनवरी का नववर्ष थोपा गया,
उस समय लोग विक्रमी संवत के अनुसार
1 अप्रैल से अपना नया साल मनाते थे,
आज भी हमारे बहीखाते और बैंक 31 मार्च को बंद होते हैं और 1 अप्रैल से शुरू होते हैं ।
जब भारत गुलाम था तो विक्रमी संवत का नाश करने के लिए साजिश करते हुए,
1 अप्रैल को मूर्खता दिवस “अप्रैल फूल” का नाम दे दिया ताकि हमारी सभ्यता मूर्खता लगे ।
याद रखो अप्रैल माह से जुड़े हुए ऐतिहासिक दिन और
त्यौहार…
1. हिन्दुओं का पावन महीना, इस दिन से शुरू होता है ।
(शुक्ल प्रतिपदा)
2. भारत के रीति-रिवाज, सब इस दिन के कलेण्डर
के अनुसार बनाये जाते हैं ।
एक महिला, जहाँ भी उँगली रखती, उसे ही कोसती क्योंकि उसकी उँगली में दर्द होने लगता था, उँगली में फ्रैक्चर था ।
तो, दर्द का कारण बाहर था या उसके अंदर ?
श्री रत्नसूरीश्वर जी
नियम इसलिये बने हैं ताकि हम बनें रह सकें….
लेकिन हो यह रहा है कि नियम तो बनते जा रहे हैं, लेकिन हम टूटते जा रहे हैं ।
गुरु मुनि श्री क्षमा सागर जी

(धर्मेंद्र)
जब वाणी मौन होती है,
तब मन बोलता है;
जब मन मौन होता है,
तब आत्मा बोलती है;
जब आत्मा मौन होती है,
तब परमात्मा से साक्षात्कार होता है..!
(ललित-ग्वालियर)
इसके पालन से विकृति से बचते हैं ।
जिस दूध के संस्कार कर दो वह दूध फटता नहीं/विकृत नहीं होता है ।
ज़िंदगी की
चादर पर
रोज़
एक छेद
हो जाता है…
ताकि
जीने वाला
झाँक कर देख सके
कि अब मौत
उसके
कितने क़रीब है….
पूज्य गुरु मुनि श्री क्षमा सागर
2 प्रकार –
- आराध्य – जो की पूज्यता के दायरे में आते हैं ।
- इष्ट – जिनकी नित्य पूजा करते हैं ।
संकट के समय इनका सहारा बहुत महत्त्वपूर्ण है ।
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