सीमा के बाहर की उपलब्धि दुःखदायी बन जाती है।
जैसे सर्दियों में ऊँचे पहाड़ पर चढ़ते समय गर्म कपड़े।
अति सफाई के लिये बार-बार झाडू टूट कर गंदगी पैदा करती है।
सीमा से अधिक मिठाई खाना।

ब्र. डॉ. नीलेश भैया

मेडिकल विद्यार्थियों को शरीर रचना सिखाते समय डॉक्टर ने मुर्दे की नाक में उंगली डाली और चूसने लगा।
पहली सीख – घृणा नहीं करना। तुम सब ऐसा ही करो। सबने उंगली डाली और चूसने लगे, सबको उल्टियाँ होने लगीं।
दूसरी सीख – नज़र टिकाये रखो (वरना ऑपरेशन बिगड़ जायेगा)। तुम्हारी नज़र टिकी नहीं थी, मैंने एक नाक में उंगली डाली थी और चूसी दूसरी थी।

हर्र एक बहुत गुणवान देसी औषधि है। अलग-अलग मौसमों में अलग-अलग चीजों के साथ प्रयोग करना चाहिए जैसे…
1) वर्षा ऋतु: श्रावण और भाद्रपद माह में सेंधा नमक के साथ,
2) शरद ऋतु: आश्विन और कार्तिक माह में शक्कर/ खाँड,
3) हेमंत ऋतु: मार्गशीर्ष और पौष माह सोंठ के साथ,
4) शिशिर ऋतु: माघ और फाल्गुन माह में पीपल,
5) वसंत ऋतु: चैत्र और वैशाख माह में चाशनी,
6) ग्रीष्म ऋतु: ज्येष्ठ और आषाढ़ माह में गुड़ के साथ,
ऐसे प्रयोग करने से पित्त तथा वायु नियंत्रण में रहती हैं।

मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 26 जून)

Independent बनने के लिए बिटिया लोगों को कितनों की Dependency सहनी पड़ती है। कई बार तो अपमानजनक स्थिति का भी सामना करना होता है (विशेष परिस्थितियाँ अपवाद हैं)।
अर्थोपार्जन के स्थान पर परिवारोपार्जन करें तो अनेक फायदे।

मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 16 जून)

जो दूसरों को जिंदा न रहने दे, उसे जिंदा नहीं कह सकते/ उसे जिंदा रहने का अधिकार नहीं।
2) जो गुरु/ भगवान के सामने अकड़ा रहे (मुर्दे जैसा) उसे जिंदा कैसे कहें !

चिंतन

धर्म स्व-आश्रित ही नहीं, पर निमित्तक भी है।
साधुजन भी गृहस्थों की भोजन व्यवस्था लेते हैं।
काया के आश्रित तो साधु तथा गृहस्थ दोनों रहते हैं।
आज के समय में पुरुषार्थ भी शरीर के आश्रित है।

निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी

ना काफ़ी (मिठास), नाही फीका, सच्ची मिठास प्राकृतिक।
काफ़ी मिठास – जलेबी में पर मायाचारी का प्रतीक,
फीका मिठास – रसगुल्ले में पर मिलावटी (पनीर + आटा),
प्राकृतिक मिठास – गन्ने का Pure, फायदेमंद।

मुनि श्री मंगलानन्द सागर जी

मैं बुद्ध होने उठा, आशा ही दुःख का कारण है, सोचकर सो गया।
मुझसे वक़्त (समय) पूछा किसी ने, बुरा चल रहा है।
मैंने चाहा जख्म भर जाये, जख्म ही जख्म हो गये।
बेटी → भगवान मेरे पिता को अच्छा दामाद मिल जाये, छोटी बहन को अच्छा पति मिल गया।

ब्र. डॉ. नीलेश भैया

उन्नति आगे बढ़ना नहीं, ऊपर उठना है।
अवरोध आने पर पानी ऊपर उठता है।
हमारे जीवन में भी व्यवधान आयें तो उनको हटाने में अपनी शक्ति जाया न करें, उनको सीढ़ी बनाकर ऊपर उठें, तब ही उन्नति होगी।

मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 11 जून)

पॉजिटिव थिंकिंग यह नहीं कि “मैं कर ही लूंगा” बल्कि वह जिसका रियलिस्टिक थिंकिंग से तालमेल हो।
जैसे इंटरव्यू में “मैं क्लियर कर ही लूंगा” नहीं, मैं कंपनी के फायदे की सोचूँगा, सेलेक्ट हो गया तो कंपनी का फायदा, सेलेक्ट ना होने पर भी अफ़सोस नहीं बल्कि सोचूँगा, यह तो कंपनी का ही नुकसान हुआ !

मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 10 जून)

बीज को मुट्ठी में पकड़े रहने से उसकी सुरक्षा नहीं/ उसकी संतति नहीं।
माटी को मान देने से मान रूपी बीज जब अपना मान समाप्त कर देता है तब वह वृक्ष बनकर सबका सम्मान पाता है।
अपना मान मिटाने से ही सम्मान मिलता है।

मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 10 जून)

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