1) क्रोध आने के कारण…
* मनोवृत्ति
* आसक्ति
* अपेक्षा
गुरवर श्री क्षमासागर जी
2) क्रोध पर क्रोध करने से क्रोध कम नहीं होगा,
क्षमा रूपी दीपक के प्रकाश में क्रोध का अंधकार पास नहीं आ पायेगा ।
पूरी जिंदगी हम इसी बात में गुजार देते हैं कि……. “चार लोग क्या कहेंगे”,
और अंत में चार लोग बस यही कहते हैं कि…. “अरिहंत नाम सत्य है / राम नाम सत्य है” ।
(नीलांजना)
असफलता का एक कारण –
छलाँग लगाते समय घोड़े की लगाम को खींच लेना ।
(सुरेश)
ABC of Success…
Ability
Breaks
Courage.
“बुराई ” करना रोमिंग की तरह है,
बोलो तो भी चार्ज लगता है और सुनो तो
भी ।
“नेकी” करना LIC की तरह है,
ज़िंदगी के साथ भी,
ज़िंदगी के बाद भी ।
तो “धर्म” की प्रीमियम भरते रहो
और अच्छे कर्म का “बोनस” पाते रहो……।
(अपूर्व श्री)
Spritual development is inversely proportional to dependence on the world.
If our inner growth is low, we need a high standard of living to feel comfortable.
(Dr.P.N.Jain)
पराश्रित सुख से उत्तम स्वाश्रित दुःख है,
तभी तो साधु विषय-सुखों का त्याग करके तप के दुःख को अंगीकार करके सुखी रहते हैं।
क्षु.श्री ध्यान सा.जी
मेरी चिता सजाने के लिए, इन पेड़ों को मत काटो….
यदि अगला जन्म पक्षियों का मिला, तो घोंसला कहाँ बनाऊँगा ।
(धर्मेंद्र)
स्वर्ण कितना भी मूल्यवान क्यों ना हो,
किन्तु सुगंधि पुष्प से ही आती है ।
हालाँकि श्रृंगार के लिये दोनों का ही महत्त्व है ।
इसी तरह ज्ञान कितना भी मूल्यवान क्यों ना हो;
किंतु,
उसकी सुगंधि, बिना आचरण के नहीं आ सकती ।
(मंजू)
कितना अजीब है ना…
84 लाख योनियों में एक मानव ही धन कमाता है,
पर
अन्य कोई जीव कभी भूखा नहीं मरा,
और मानव का कभी पेट नहीं भरा !
(धर्मेंद्र)
The oneness of human beings is the basic ethical thread that holds us together.
(धर्म के क्षेत्र में इसे “एकत्व भाव” कहते हैं, जो मोक्ष ले जाने में मुख्य कारण है)
“मन” बड़ा चमत्कारी है,
…. इसके ……
आगे “न” लगाने पर वह “नमन” हो जाता है,
और
पीछे “न” लगाने पर “मनन” हो जाता है ।
जीवन में नमन और मनन करते चलिए,
जीवन सफल ही नहीं सार्थक भी हो जाएगा ।
(अंजना-शिवपुरी)
Hello.. Sir,
Calling from Old Age Home…
We saw Your Advertisement of Missing Dog.
It has come here and is playing with Your “Mother” !!
कुछ ग़ैर ऐसे मिले
जो मुझे अपना बना गए…!
कुछ अपने ऐसे निकले,
जो गैर का मतलब बता गए…!
दोनों का शुक्रिया ।
(मंजू)
अयोध्या से वापस आने पर माँ कौशल्या ने पूछा…
“रावण” को मार दिया ?
भगवन श्रीराम ने सुन्दर जवाब दिया…
महाज्ञानी, महाप्रतापी, महाबलशाली, प्रखंड पंडित, महान भक्त को “मैंने” नहीं मारा,
उसे “मैं” ने मारा ।
(एकता – पुणे)
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