एक ड़ाल पर दो उल्लू,
एक के मुँह में साँप, दूसरे के में चूहा;
साँप के मुँह में पानी(1), चूहे का मुँह भयभीत(2) ।
(1) चूहे को देखकर
(2) साँप को देखकर

विड़म्बना-
(1) आहार की लोलुपता के आगे
तथा
(2) भय के आगे
मौत भी अदना लगने लगती है ।

नंगे पाँव चलते “इन्सान” को लगता है
कि “चप्पल होती तो कितना अच्छा होता”
फिर ऐसा लगा कि………
“कार होती तो धूप नहीं लगती”
फिर लगा कि,
“हवाई जहाज होता तो इस ट्रैफिक का झंझट नहीं होता”
जब हवाई जहाज में बैठकर नीचे हरे-भरे घास के मैदान देखता है तो सोचता है कि,
“नंगे पाव घास में चलता तो दिल को कितनी तसल्ली मिलती !”

(जे.पी.शर्मा)

नल बंद करने से नल बंद होता है, पानी नहीं!
घड़ी बंद करने से घड़ी बंद होती है,समय नहीं!
दीपक बुझाने से दीपक बुझता है, रोशनी नहीं!

झूठ छुपाने से झूठ छुपता है, सत्य नहीं!

(कट्टू-विदिशा)

दर्पण जब चेहरे का दाग दिखाता है, तब
हम दर्पण नहीं तोड़ते बल्कि दाग साफ़
करते हैं।
उसी प्रकार हमारी कमी बताने वाले पर
क्रोध करने के बजाय कमी दूर करना श्रेष्ठ
है।

(मयूर जैन)

डाली से टूटा फूल फिर से नहीं लग सकता है,
मगर..
डाली मज़बूत हो तो उस पर नया फूल खिल सकता है!

इसी तरह ज़िंदगी में खोये पल को ला नहीं सकते,
मगर…
हौसले व विश्वास से आने वाले हर पल को खुबसूरत
बना सकते हैं!

(अभिषेक-देहली)

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