किसी ने ख़ुदा से मौत माँगी !
खुदा ने कहा…
मौत तो तुझे दे दूँ, मगर उससे क्या कहूँ !!
जिसने तेरी ज़िंदगी की दुआ माँगी !!!
(श्रीमती शर्मा)
परिस्थिति पाप नहीं कराती,
पाप तो मन:स्थिति से होता है।
जिस परिस्थिति में रागी, पाप करता है;
उसी परिस्थिति में वैरागी पुण्य करता है ।
(क्षु.श्री ध्यान सा.जी)
जो वस्तु को जला दे, उसे आग कहते हैं ।
जो जीवन को जला दे, उसे राग कहते हैं ।
जो जीवन को उठा दे, उसे त्याग कहते हैं ।
जो मुक्ति में पहुँचा दे, उसे वैराग्य कहते हैं ।
(ब्र.संजय)
कंडक्टर सी हो गयी है ज़िंदगी,
जाना भी रोज़ का है
और
जाना कहाँ मालूम नहीं !
थक गया हूँ तेरी नौकरी से ऐ ज़िंदगी,
बहतर हो मेरा हिसाब कर दे ।
(जे.पी.शर्मा)
Best MANAGEMENT is…
SELF-management.
गोपालदास नीरज जी की एक रचना……
छिप-छिप अश्रु बहाने वालों!
मोती व्यर्थ लुटाने वालों!
कुछ सपनों के मर जाने से
जीवन नहीं मरा करता है।
खोता कुछ भी नहीं यहाँ पर,
केवल जिल्द बदलती पोथी।
चंद खिलौनों के खोने से
बचपन नहीं मरा करता है।
लूट लिया माली ने उपवन,
लुटी न लेकिन गंध फूल की,
कुछ मुखड़ों की नाराज़ी से
दर्पण नहीं मरा करता है।।
कुछ स्वप्नों के मर जाने से
जीवन नहीं मरा करता है….
(अरुणा)
विभीषण, रावण के साथ रहकर भी नहीं बिगड़े !
केकैई, राम के साथ रहकर भी नहीं सुधरी !!
(तनेजा जी)
(ज़रूरी नहीं कि संगति का प्रभाव हो ही,
या सब पर एक सा हो)
“अकेलापन” इस संसार में सबसे बड़ी सज़ा है ! और
“एकांत” सबसे बड़ा वरदान !!
“अकेलेपन” में छटपटाहट है, घबराहट है;
तो “एकांत”में आराम, शांति ।
जब तक हमारी नज़र बाहर की ओर है, तब तक हम “अकेलापन” महसूस करते हैं
और
जैसे ही नज़र भीतर की ओर मुड़ी
तो “एकांत” अनुभव होने लगता है।
ये जीवन और कुछ नहीं वस्तुतः
“अकेलेपन” से “एकांत” की ओर एक यात्रा है !!
(ब्र.संजय)
एक बकरी के पीछे शिकारी कुत्ते दौड़े। बकरी जान बचाकर अंगूरों की झाड़ी में घुस गयी। कुत्ते आगे निकल गए। बकरी ने निश्चिंतापूर्वक अँगूर की बेलें खानीं शुरु कर दीं और ज़मीन से लेकर अपनी गर्दन पहुचे, उतनी दूरी तक के सारे पत्ते खा लिए। पत्ते झाड़ी में नहीं रहे। छिपने का सहारा समाप्त हो जाने पर कुत्तों ने उसे देख लिया और मार डाला !
सहारा देने वाले को जो नष्ट करता है, उसकी ऐसी ही दुर्गति होती है।
मनुष्य भी आज सहारा देने वालीं जीवनदायिनी नदियों, पेड़ पौधों, जानवरों, पर्वतों आदि को नुकसान पहुँचा रहा है और इन सभी का परिणाम भी अनेक आपदाओं के रूप में भोग रहा है।
(आर.के.गुप्ता)
Success is getting what you want.
Happiness is wanting what you get.
(What do you want?
Success or Happiness ? )
जब कण कण में भगवान हैं तो तुम मंदिर क्यों जाते हो ?
हवा तो धूप में भी चलती है पर आनंद छाँव में बैठ कर ही मिलता है,
वैसे ही भगवान सब तरफ़ है पर आनंद मंदिर में ही आता है ।
(अंजना-शिवपुरी)
शिकायतें तो बहुत हैं
तुझसे ऐ ज़िंदगी,
पर चुप इसलिये हूँ कि,
जो दिया तूने वो भी
कहाँ पूरा जीया हमने …
(विजय-आगरा)
नहीं छोड़ी कमी,
किसी भी रिश्ते को निभाने में मैंने ।
आने वालों को दिल का रास्ता दिया,
और जाने वालों को रब का वास्ता ।
(नमिता-सूरत)
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