बंद मंदिर को भी देखकर हाथ जोड़ने को उठ जाते हैं,
तो
खुला नल देखकर बंद करने को क्यों नहीं !
(अरुणा)
The great artist and thinker are the simplifiers.
फलदार पेड़ों से फल गिरते रहते हैं,
पर
नये नये फल लगते रहते हैं ।
क्यों ?
क्योंकि मोह की जड़ें बड़ी गहरी हैं,
वे लगातार रस भेजती रहतीं हैं;
और
कर्म-फल लगने का सिलसिला टूटता नहीं ।
जिन्हें अपनी गाड़ी???? छांव में लगाने का शौक है,
वो पेड़ लगाने का भी शौक रखें ।
(रजत-शिवपुरी)
दो बच्चे देरी से स्कूल पहुँचे ।
कारण !
पहले का सिक्का गिर गया था ।
दूसरा सिक्के पर पैर रक्खे खड़ा रहा था ।
सज़ा दोनों को मिली ।
खोने वाला भी दुखी,पाने वाला भी;
यही तो संसार है !!
ज़िन्दगी में इतनी गलतियाँ ना करो,
कि पेन्सिल से पहले रबर घिस जाये !
और
रबर को इतना मत घिसो,
कि ज़िन्दगी का पेज ही फट जाये !!
(आर.के.गुप्ता)
Education is not the clearing of the pale*,
rather,
it is the lighting of the fire.
*धुंधलका
सांसारिक बंधन पुराने जूते जैसा होता है – पता ही नहीं लगता कि पैर जूते में फंसा है ।
पता तब लगता है जब जूता काटता है ।
निर्यापक मुनि श्री वीरसागर जी
असंविधानिक कार्य तो अवांछनीय है, पर अनैतिक कार्य तो अक्षम्य है ।
परमार्थ से अर्थ का महत्त्व जब बढ़ जाता है,
तब,
हम स्वार्थी बन कर अनर्थ की ओर बढ़ जाते हैं ।
प्रसन्न वही जो प्रशंसा में प्रसन्न न हो,
(तभी तो आलोचना में भी प्रसन्न रह पायेगा ) ।
शरीर में सामर्थ्य ना हो तो साधना कैसे करें ?
साधना शरीर से कम,मुख्य रूप से मन साधने से होती है ।
बटुए को कहाँ मालूम था कि पैसे उधार के हैं,
वो तो पहले की तरह फूला ही रहा ।
(मंजू)
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