कौन कहता है कि ईश्वर नज़र नहीं आता ।
एक वही तो नज़र आता है ….
जब कुछ नज़र नहीं आता ।

फलदार पेड़ों से फल गिरते रहते हैं,
पर
नये नये फल लगते रहते हैं ।
क्यों ?
क्योंकि मोह की जड़ें बड़ी गहरी हैं,
वे लगातार रस भेजती रहतीं हैं;
और
कर्म-फल लगने का सिलसिला टूटता नहीं ।

दो बच्चे देरी से स्कूल पहुँचे ।
कारण !
पहले का सिक्का गिर गया था ।
दूसरा सिक्के पर पैर रक्खे खड़ा रहा था ।
सज़ा दोनों को मिली ।

खोने वाला भी दुखी,पाने वाला भी;
यही तो संसार है !!

सांसारिक बंधन पुराने जूते जैसा होता है – पता ही नहीं लगता कि पैर जूते में फंसा है ।
पता तब लगता है जब जूता काटता है ।

निर्यापक मुनि श्री वीरसागर जी

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April 8, 2022

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