देव-दर्शन बाह्यप्रवृत्ति को अंतरमुखी करता है।

(डॉ. जया )

धर्माचरण का उद्देश्य पाप काटना हुआ तो फल आधा मिलेगा,
पाप त्यागने का उद्देश्य हुआ तो फल पूरा तथा तुरंत शुरू ।

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

कोरा ज्ञान अच्छा नहीं माना जाता ।
क्यों ?

कोरा कपड़ा नहीं पहना जाता, धुलकर ही पहनने लायक होता है ।

ज्ञान चारित्र/अनुभव से जब धुल जाता है/ परिष्कृत हो जाता है, तब उपयोगी बन जाता है ।

चिंतन

लंका विजय के बाद श्री राम सबको दो पद (राजा/मंत्री) दे रहे थे ।
हनुमान ने भी दो पद माँगे, वे पद थे – श्री राम के दो पद ।

जिसने गुरू/भगवान के दो पद पालिये, उसे संसार के सारे पद मिल जाते हैं, वह परमपद को प्राप्त कर लेता है ।

आर्यिका श्री विनतमति माताजी

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April 8, 2022

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