मोह कम/ समाप्त कैसे होता है ?
संसार/ सम्बन्धों को क्षणिक/Temporary मानने, उसका बार-बार चिंतवन करने से।

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

भाग्य / पुरुषार्थ…
एक प्रसिद्ध ज्योतिषी ने मेरी उम्र 62 वर्ष बतायी थी। फिर थोड़ा धर्म/ अनुशासित जीवन किया तो 72 वर्ष पर आ गया। तब धर्मादि और बढ़ाये, 80 वर्ष तक आ चुका हूँ, लगता है 82 वर्ष होने की सम्भावना है।

चिंतन

शुभ… यानी अशुभ से दूर।
लाभ… यानी फायदा –> संसार में धनादि का (धर्म में आत्मकल्याण का)।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

आचार्य मानतुंग के अनुसार धनवान वह जो अपने धन का उपयोग धनहीनों को धन, पुण्यवानों को आहार दानादि, बराबर वालों को सहयोग प्रदान करता हो।

निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी

बारात के पीछे हॉर्न बजाने से फ़ायदा कुछ नहीं,
नुकसान –> आकुलता, ध्वनि-प्रदूषण।
बेहतर है नाच लो –> कलुषता कम होगी, न्योछावर राशि में नोट भी मिल जाएँ।

ब्र. डॉ. नीलेश भैया</span

आत्मा शरीर के माध्यम से भोग करती है। तभी तो शरीर पर चींटी, अनुभव आत्मा करती है।
आत्मा निकलने के बाद बिच्छू भी काट ले तो अनुभव नहीं।
प्रश्न… फिर मरने पर “राम/ अरिहंत नाम सत्य” क्यों सुनाते हैं ?
मुर्दे को नहीं, ले जा रहे लोगों को सुनाते हैं।

चिंतन

अहिंसा मुनियों के लिये क्योंकि उनके पास अनुकम्पा करने के साधन नहीं होते हैं।
अनुकम्पा तो गृहस्थों के लिये होती है।

निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी

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