अंधकार/छाया को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु अंधकार एवं छाया को स्वीकार करना परम आवश्यक है। स्वीकार करके सहन करना भी आवश्यक है।
वैसे तो यह परिभाषा है दोनों की, दोनों शब्द मिलते जुलते हैं confusing हैं इसके लिए इन दोनों की परिभाषा अलग-अलग की गई। पर इनका जीवन में सिंबलाइजेशन ऐसे कर सकते हैं कि अंधकार पाप का/ दुखों का प्रतीक होता है तो जो छाया है वह टेंपरेरी है/ शॉर्ट टर्म है और जो अभाव है वह लॉन्ग टर्म जैसे पूरी रात और थोड़े समय के लिए छाया लेकिन लॉन्ग टर्म भी कोई भी इतना बड़ा नहीं होता कि फॉरएवर हो, रात के बाद सुबह होगी ही। यह अपन सोच कर कंसोल हों।
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अंधकार/छाया को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु अंधकार एवं छाया को स्वीकार करना परम आवश्यक है। स्वीकार करके सहन करना भी आवश्यक है।
Iska symbolic significance kya hai, please ?
वैसे तो यह परिभाषा है दोनों की, दोनों शब्द मिलते जुलते हैं confusing हैं इसके लिए इन दोनों की परिभाषा अलग-अलग की गई। पर इनका जीवन में सिंबलाइजेशन ऐसे कर सकते हैं कि अंधकार पाप का/ दुखों का प्रतीक होता है तो जो छाया है वह टेंपरेरी है/ शॉर्ट टर्म है और जो अभाव है वह लॉन्ग टर्म जैसे पूरी रात और थोड़े समय के लिए छाया लेकिन लॉन्ग टर्म भी कोई भी इतना बड़ा नहीं होता कि फॉरएवर हो, रात के बाद सुबह होगी ही। यह अपन सोच कर कंसोल हों।
Okay.