शून्य
शून्य अंदर/ बाहर से खाली होता है।
जिनका जीवन अंदर/ बाहर से खाली होता है, उनके जीवन में पूर्ण विराम लग जाता है। शून्य पूर्णता का प्रतीक है। (जिस अंक के पीछे भी लगा दो तो उसकी कीमत बढ़ जाती है)।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
शून्य अंदर/ बाहर से खाली होता है।
जिनका जीवन अंदर/ बाहर से खाली होता है, उनके जीवन में पूर्ण विराम लग जाता है। शून्य पूर्णता का प्रतीक है। (जिस अंक के पीछे भी लगा दो तो उसकी कीमत बढ़ जाती है)।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
2 Responses
शून्य को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। शून्य अंदर एवं बाहर से खाली रहता है। अतः जीवन में शून्यता आना परम आवश्यक है।यह भी सही है कि जिस अंक के पीछे लगाने पर उसकी कीमत बढ़ जाती है।
‘शून्य’ ki sundarta ko Gurudev ne bahut hi acchi tarah se explain kiya hai ! Namostu
Gurudev!