पुण्य
पुण्य जल है, पाप मल है।
ऐसे पुण्य का अर्जन करो जो पाप को धो दे।
ऐसे पुण्य का अर्जन, पवित्र परिणामों से होता है।
(ऐसा आचार्य श्री विद्यासागर जी कहते थे-)
आचार्य श्री समयसागर जी
पुण्य जल है, पाप मल है।
ऐसे पुण्य का अर्जन करो जो पाप को धो दे।
ऐसे पुण्य का अर्जन, पवित्र परिणामों से होता है।
(ऐसा आचार्य श्री विद्यासागर जी कहते थे-)
आचार्य श्री समयसागर जी
One Response
पुण्य को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए पाप को समाप्त करने के लिए पुण्य का अर्जित करना परम आवश्यक है। इसके अतिरिक्त पुण्य का त्याग करना भी आवश्यक है।