Category: डायरी

भगवान और इनसान

मिट्टी की मूर्तियाँ बनाने वाला कलाकार ईश्वर से कहता है…..  हे प्रभु ! तू भी एक कलाकार है और मैं भी एक कलाकार हूँ, तूने

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भक्ति / ज्ञान / चारित्र

भक्त बार बार जन्म माँगता है; ज्ञानी बार बार जन्म ना मिले, ऐसी भावना भाता है; चारित्रधारी कुछ भी नहीं माँगता, पर उसे बिना माँगे

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पुण्य तिथि

साधु संतों की बरसी को पुण्य तिथि कहना ठीक है । पर साधारण व्यक्ति के साधारण मरण को वैराग्य या पुण्यवर्धक तिथि कहना चाहिेए ।

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मीठे बोल

समय बहाकर ले जाता है… नाम और निशान, कोई “हम” में रह जाता है, कोई “अहम्” में । बोल मीठे ना हों तो हिचकियाँ भी

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Trouble

We can’t stop troubles from coming towards us. But We can make sure that we do not offer them chairs to sit on. (Parul-Delhi)

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पराक्रम / प्रेम

छोटी उँगली पर पूरा गोवर्धन पर्वत उठाने वाले, श्री कृष्ण, बाँसुरी दोनों हाथों से बजाते थे । बस इतना ही अंतर है, पराक्रम और प्रेम

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अज्ञानी

बच्चा समझाने पर भी विषफल वापस नहीं देता है । श्री हरिवंश पुराण

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अनुभूति

अनुभूति का संबंध जाति/पर्याय से नहीं है ; ज्ञानी को नहीं, अंर्तज्ञानी को होती है ।

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मंगल आशीष

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