Category: पहला कदम

वनस्पति

वनस्पतियों को तीन श्रेणी में बाँट सकते हैं… पहली जो हवा में झूलती रहती हैं। इनमें सबसे कम दोष होता है जैसे लौकी आदि। दूसरी

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चलित-भोजन

जब भोजन एक घर/ स्थान से दूसरे में ले जाया जाता है, रास्ते में भोजन के विकृत होने की संभावना हो जाती है, खासतौर से

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आहार मुद्रा

आहार के लिये जाते समय पाँचों उंगलियों को मिलाकर (मुनि कंधे पर, ऐलक/ क्षुल्लक हाथ लटकाकर) क्यों जाते हैं ? शायद इसलिये कि भोजन पाँचों

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करणानुयोग

करणानुयोग का ज्ञान घृतवर समुद्र के जल जैसा यानी रागद्वेष नहीं। आगे के सब समुद्रों का जल इक्षु रस जैसा होता है। मुनि श्री प्रणम्यसागर

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सामायिक आदि

सामायिक— समता संबंधी, श्रमणों के जीवन में, बारह और वैराग्य भावना आदि के द्वारा संसार के सही स्वरूप का चिंतन करना। सामयिक— समय संबंधी, श्रावकों

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कुन्दकुन्द स्वामी / विदेह

कुन्दकुन्द स्वामी विदेह नहीं गये थे। यहीं से भावों से वंदना की थी। गणधर जी ने आशीर्वाद दिया था। ऐलक श्री विवेकानन्दसागर जी

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क्षपक

सल्लेखना करने वाले को भी क्षपक तथा श्रेणी माणने वाले को भी? क्योंकि कर्मों का क्षय दोनों ही करते हैं, अपने-अपने तरीकों से। मुनि श्री

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शिखर जी

लगभग 30 साल पहले शिखर जी की यात्रा करते समय, मित्र साथ में था। आखिरी 9 किलोमीटर रह जाने पर उसके मुँह में कफ आ

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श्री, ह्रीं… देवी

ये देवियाँ (श्री, ह्रीं, धृति, कीर्ति, बुद्धि, लक्ष्मी) भगवान की माँ की सेवा (क्रमश: शोभा, लज्जा, धैर्य, कीर्ति, बुद्धि, वैभव बढ़ाने) के लिये नियुक्त होती

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मंगल आशीष

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