Category: पहला कदम

तेरस

धन्य-तेरस, जब भगवान महावीर भगवान को ते*रस, बे रस लगने लगे थे, उनको नये रस आने लगे थे। ब्र. डॉ. नीलेश भैया * पुराने।

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आस्था

आचार्य श्री विद्यासागर जी कहा करते थे.. किसी की आस्था पर चोट करना भी चोरी है। यह मिथ्यात्व है/ गलत है, ऐसा बार-बार कहने से

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अहिंसा

शुद्धि के लिए जाते समय मुनिराज कागज की पुड़िया में बेसन ले जाते थे। 2013 में आचार्य श्री विद्यासागर जी ने कहा… कागज भी क्यों

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हिंसानंदी

हिंसानंदी रौद्रध्यान यानी हिंसा में आनंद लेना। पर इसका उल्टा भी हिंसानंद होगा –> “आनंद के लिये हिंसा करना जैसे शिकार।” चिंतन

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लिपि

भगवान वृषभनाथ ने अपनी बेटी ब्राह्मी को लिपि देवनागरी(विद्या) सिखाई थी, भाषा नहीं। दुर्भाग्य आज हम हिंदी को भी रोमन लिपि में लिख रहे हैं,

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Multi-tasking

Multi-tasking तो सिर्फ़ केवलज्ञानियों की हो सकती है। सामान्य व्यक्ति में तो संभव ही नहीं क्योंकि उपयोग एक समय में एक ही टास्क पर लगता

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देवों का नरक भ्रमण

क्या सीता का जीव सोलहवें स्वर्ग से नरक सम्बोधन के लिए गया था? भक्ति/प्रथमानुयोग के अनुसार कथन है, इसमें करणानुयोग को गौण कर दिया जाता

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अहमिन्द्रों की धर्म-चर्चा

अहमिन्द्रों की धर्म-चर्चा अनंतकाल तक बिना दोहराये कैसे संभव ? उनकी चर्चा का विषय प्रथमानुयोग होता है। महापुरुषों की संख्या अनंत सो चर्चा भी अनंतकाल

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अवज्ञा

बच्चे हों या ग्राहक, आपकी बात न सुनने, न मानने और अपनी ही तानने का क्या कारण है ? 1) अभक्ष्य भक्षण 2) अपशब्दों का

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स्वाध्याय

स्वाध्याय को परम-तप तभी कहा जा सकता है जब प्रशमता परम-श्रेणी की हो। मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 27 जून)

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मंगल आशीष

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