Category: वचनामृत – अन्य
धार्मिक क्रियायें / पापोदय
क्या धार्मिक क्रियायें करने से पापोदय शांत होता है ? धार्मिक क्रियायें करने से पुण्य मिलता है, पुण्य अर्जन से पापोदय शांत होता है ।
माँ और पत्नी
पत्नी का तो जीवन भर का साथ है, माँ तो थोड़े दिन की, खुश किसे रखें ? माँ का आशीर्वाद तो जीवन भर का है,
बुरा समय
चोट लगे (स्थान) में चोट बहुत पीड़ा देती है । बुरे समय में किसी से उलझें नहीं, सावधानी बहुत रखें । (कोरोना भी तो हम
वस्त्रों का महत्व
पूजा/आहार में शुद्ध धोती-दुपट्टा पहनने से बाह्य शुद्धता के साथ साथ अंतरंग शुद्धता/शक्ति बढ़ जाती है । जैसे पुलिस वाला यदि सादा कपड़ों में हो
स्वभाव
शरीरों के स्वभाव अलग अलग – मिट्टी व जल स्वभाव वाले एकमेव, धातु लकड़ी को -काटेगी, अग्नि लकड़ी को -जलायेगी, विपरीत स्वभाव वाले । इसलिये
नीति / नीयत
नेता नीति बना सकता है, पर उसका Implementation जनता की नीयत तय करेगी । मुनि श्री प्रमाणसागर जी (धर्म के क्षेत्र में भगवान नीति बनाते
सेवा
जो सेवा की जाती है, वह सकाम सेवा है ; जो सेवा होती है, वह निष्काम सेवा है मुनि श्री प्रमाण सागर जी *विपत्ति के
ख्याति
3 प्रकार की – 1. श्वान जैसी – जहाँ जहाँ मालिक जाता है, उसके पीछे पीछे चले । 2. बिल्ली जैसी – कभी साथ, कभी
आलोचना
आलोचना से लोचन खुलते हैं । आचार्य श्री विद्यासागर जी इसलिये आलोचना का स्वागत करो (स्व+आगत)(अच्छे से बुलाना – पं.रतनलाल बैनाडा जी), स्व का हितकारी/प्रिय
सत्ता
राज-सत्ता = दबाब से चलती है, लोक-सत्ता = प्रेम से चलती है, प्रभु-सत्ता = विशुद्धि से चलती है । मुनि श्री प्रमाणसागर जी
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