Category: वचनामृत – अन्य
आसत्ति
जो सिर्फ़ आ सकती है, पर आकर जा नहीं सकती । “Attached” से समस्या नहीं है, “Attachment” से समस्या है । मुनि श्री तरुणसागर जी
जीवन और मृत्यु
जीवन एक बुलबुला है, किसी का छोटा किसी का बड़ा, मृत्यु, उसमें छेदा गया काँटा है । जो अपने को बड़ा मानता है, वह भी
ज्ञानी की रुचि
ज्ञानी को विषयों में अरुचि, ऐसे ही जैसे मिठाई खाने के बाद मीठा दूध भी फीका लगता है । क्षु. ध्यानसागर जी
सुख / शान्ति
व्यथा में सुख की नहीं, शान्ति की तलाश रहती है । सुख की खोज तो अंतहीन है (जैसे ही व्यथा समाप्त हुई, फिर से सुख
समय
दिन कब बीते हैं… सिर्फ हम बीत जाते हैं । घड़े फूटे भर हों स्वयं रीत जाते हैं…. ऐलक श्री सम्यक्त्वसागर जी
ऊर्जा
बच्चे खेल-कूद में अपनी ऊर्जा को लगाते हैं, गृहस्थ संतान उत्पत्ति में, साधक, ध्यान की एकाग्रता में । क्षु. श्री ध्यानसागर जी
सफ़लता
निराशा असफ़लता की पहली निशानी है । असफ़लताऐं तो सफ़लता की सीढ़ीयाँ हैं । प्रशंसा को प्रोत्साहन और निंदा को चेतावनी मानने वाले ही सफ़ल
धोखा
विभीषण के राम की शरण में आते समय सलाहकारों ने कहा – वह धोखा दे सकता है । राम – धोखा देना पाप है, खाना
वृद्ध
वो जिनके गुण वृद्ध (अधिक) हों, या गुणों में वृद्धि को प्राप्त हों । क्षु. श्री ध्यानसागर जी
सर्वश्रेष्ठ
हीरो बनने से पहले ज़ीरो बनना ज़रूरी है । क्षु. श्री ध्यानसागर जी
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