जल भगवान पर ड़ाला जाता है, शीतलता भक्त को, विकार भक्त के धुलते हैं ।

यदि आप के चंद मीठे बोलों से किसी का रक्त बढ़ता है तो यह भी रक्त-दान है,
यदि आप के द्वारा किसी की पीठ थपथपाने से उसकी थकावट दूर होती है तो यह भी श्रम-दान है।
यदि आप कुछ भी खाते समय उतना ही प्लेट में लें कि कुछ भी व्यर्थ ना जाए तो यह भी अन्न-दान है।

???????? स्वाति-भोपाल ????????

पहले लोग भावुक होते थे,
रिश्ते निभाते थे,

फिर practical हुए,
रिश्तों से फायदा उठाने लगे,

अब professional हैं,
रिश्ते उनसे ही रखते हैं, जिनसे फायदा उठाया जा सके ।

(श्रीमती शर्मा)

जंगल कट रहा था, लेकिन फिर भी सारे पेड़ कुल्हाड़ी को ही वोट दे रहे थे,
क्योंकि पेड़ समझते थे कि कुल्हाड़ी में लगी हुई लकड़ी उनके समाज की है ।

(धर्मेन्द्र)

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