जो अपने कार्य/कर्तव्य में डूब जाता है, वह उस कार्य/कर्तव्य से कभी ऊबता नहीं है ।
धर्म के क्षेत्र में तो नित नए आनंद का अनुभव होता रहता है सो ऊबने का तो प्रश्न ही नहीं, उल्टे उत्साह बढ़ता ही रहता है ।

एक समुदाय में ब्याज लेना गुनाह है, तो बाकीयों को लेना चाहिए ?
शोषण (सामान्य से ज़्यादा नहीं) नहीं, पोषण (जिसमें दोनों पक्षों का भला हो) हो तो ले सकते हैं ।

मोह में स्वाभिमान रह नहीं सकता ।

अभिमान को ही स्वाभिमान मान लेते हैं ।
सम्मान की इच्छा रखना अभिमान है,
ऐसे कार्यों से बचना, जिससे अपमानित ना होना पड़े, यह स्वाभिमान है ।

एक शिष्य रोज़ाना पूछता था – आत्मा/परमात्मा प्रत्यक्ष दिखाओ ।
एक दिन, ऊपर से कुछ भारी वस्तु उसके ऊपर आ गिरी, उसके मुँह से आ निकला – “हे प्रभु, बचाओ” ।
गुरु – जिसने पुकारा वह आत्मा, जिसे पुकारा वह परमात्मा ।
दिख गए दोनों !!

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April 8, 2022

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